गोली लगने से मदन महतो हो गया विकलांग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jun 2015 8:28 AM (IST)
विज्ञापन

बगहा : एक बढ़िया दर्जी गोली लगने से हो गया विकलांग. उसके सिले हुए कपड़े सूरत और जलंधर में लोग पहनते थे. कारीगरी ऐसी कि दुल्हे के लिए सूट सिलता था. अब वह पूरी तरह से विकलांग हो गया है. घर पर बैठा रहता है. स्थिति ऐसी है कि अगर उसे शौच आदि जाना होता […]
विज्ञापन
बगहा : एक बढ़िया दर्जी गोली लगने से हो गया विकलांग. उसके सिले हुए कपड़े सूरत और जलंधर में लोग पहनते थे. कारीगरी ऐसी कि दुल्हे के लिए सूट सिलता था. अब वह पूरी तरह से विकलांग हो गया है. घर पर बैठा रहता है. स्थिति ऐसी है कि अगर उसे शौच आदि जाना होता तो किसी सहारे की जरूरत होती है. एक तरह से वह अपने परिवार वालों पर बोझ जैसा है.
गरीबी एवं फटेहाली ऐसी , कि उसके बाल – बच्चों को देख कर हृदय द्रवित हो उठता है. छोटी – छोटी तीन बेटियां हैं. वह पढ़ना चाहती हैं. लेकिन हालात ऐसे नहीं हैं. माल मवेशी के चारा आदि लाने के लिए वह मासूम जाती हैं. जी हां! यह बात नौरंगिया गोली कांड में घायल कठइया गांव के मदन महतो की हो रही है. सीता राम महतो के 30 वर्षीय पुत्र मदन की हालत पर तरस आती है. जमीन बेच कर बेटे का इलाज कराने वाला पिता कितना लाचार है, अब उसकी हैसियत नहीं है कि वह अपने विकलांग बेटे के लिए बैशाखी भी खरीद सके.
अच्छी भली जिंदगी थी
कठइया गांव में मदन महतो अपने घर के दरवाजे पर बैठा रहता है. इस दिन चर्या से वह तंग आ गया है. उसने बताया कि मैं दर्जी का काम करता था.पहले तो जलंधर में काम करता था.
बाद में मैं सूरत गया. वहां कपड़ा सिलाई की अच्छी नौकरी लग गयी थी. पैसे इतना कमता था जिससे घर का खर्च चल जाता था. बच्चों की पढ़ाई भी ठीक से चल रही थी. अभी हालात ऐसे हो गये हैं कि घर में खाने के भी लान्ले हैं. कर्ज से पूरी तरह से दब गये हैं. सरकार की ओर से इलाज के खच्रे के नाम पर महज 50 हजार मिला है. जबकि इलाज में करीब 5 लाख खर्च हो चुके हैं.
सिर्फ मिलता आश्वासन
मदन की पत्नी इंदू देवी का कहना है कि इनकी हालत पर तरस खाने वाले तो बहुत आते हैं, लेकिन कोई मदद नहीं करता. जमीन बिक गया है. अब रहने के लिए मात्र एक घर है. कर्ज से पूरी तरह से दब गये हैं. कर्ज चुकाने के लिए घर भी बेचना पड़ सकता है. अगर कोई मदद करने वाला है तो वह इलाज का खर्चा दिलवा दे.
मेरे पति को पेंशन मिलने लगे जिससे परिवार का भरण पोषण हो. बच्चों की पढ़ाई बाधित है.पहले वे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे. अभी आर्थिक संकट की वजह से सरकारी स्कूल में पढ रहे हैं.
गया था गौरी बेलवा गांव
मदन ने बताया कि 15 जून को मैं घर आया था. एक पुराने मित्र से मिलने के लिए गौरी बेलवा गांव गया था. वहां से लौट रहा था. 24 जून की घटना है. भगदड़ मची थी. लोग भाग रहे थे. मुङो इस घटना के बारे में कुछ भी पत्7ा नहीं था. चारों तरफ धुंआ – धुआ हुआ था.
महिला और बच्चे भाग रहे थे. तभी एक गोली आ कर मेरे पैर में धस गयी. मैं जमीन पर गिर गया. सैकड़ों लोग मेरे शरीर को कुचल कर आगे भागे होंगे. कुछ देर के बाद मैं बेहोश हो गया. उसके बाद मेरी आंख अस्पताल में खुली तो मुङो पता चला कि मेरे पैर में गोली लगी है.बांया पैर पूरी तरह से बेकार हो गया है. इतना कह कर वह रोने लगता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










