समय पर इलाज होता जो बच सकती थी डेजी

Published at :01 Jun 2015 8:20 AM (IST)
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समय पर इलाज होता जो बच सकती थी डेजी

मझौलिया : गुरचुरवा गांव के पास समपार फाटक संख्या 82 के 100 गज की दूरी पर डेजी तड़परही थी. उसका बाया हाथ अलग हो चुका था, लेकिन सांसे चल रही थी. अपनी जिंदगी के लिए वह पूरा संघर्ष कर रही थी. लेकिन मौके पर जुटे दर्जनों लोग तमाशबीन बने थे. रेलवे गेटमैन ने भी कोई […]

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मझौलिया : गुरचुरवा गांव के पास समपार फाटक संख्या 82 के 100 गज की दूरी पर डेजी तड़परही थी. उसका बाया हाथ अलग हो चुका था, लेकिन सांसे चल रही थी. अपनी जिंदगी के लिए वह पूरा संघर्ष कर रही थी.
लेकिन मौके पर जुटे दर्जनों लोग तमाशबीन बने थे. रेलवे गेटमैन ने भी कोई सक्रियता नहीं दिखायी. घटना के 50 मिनट बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने डेजी को एम्बुलेंस से सदर अस्पताल भेजवाया. जहां उसकी मौत हो गयी.
दिखायी होती सक्रियता
अस्पताल आने के बाद डेजी का इलाज डेढ़ घंटे तक चला. डॉक्टर हर कोशिश में जुटे थे कि उसकी जान बच जाये. लेकिन उसकी मौत हो गयी. मौत का कारण डॉक्टरों ने अधिक खून गिरना बताया है.
यानी यदि समय से डेजी अस्पताल पहुंच जाती तो शायद उसकी जान बच सकती थी. क्योंकि घटनास्थल पर 50 मिनट तक उसके शरीर से खून बह रहा था. स्टेशन मास्टर छवि किशोर ने गेट मैन को फटकार लगायी.
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