सालों से एक ही नंबर की गाड़ी से चल रहे हैं भाजपा सांसद व राजद नेता

Updated at : 12 Dec 2017 5:34 AM (IST)
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सालों से एक ही नंबर की गाड़ी से चल रहे हैं भाजपा सांसद व राजद नेता

बेतिया : परिवहन विभाग में वीआइपी नंबर के घोटाले का मामला सामने आया है. विभाग ने पैसे लेकर दो-दो गाड़ियों को एक ही नंबर जारी कर दिया है. बकायदा रजिस्ट्रेशन संख्या, अॉनर बुक व आरसी कार्ड भी एक ही नंबर का जारी किया गया है. वह भी किसी आम आदमी को नहीं, बल्कि जिले के […]

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बेतिया : परिवहन विभाग में वीआइपी नंबर के घोटाले का मामला सामने आया है. विभाग ने पैसे लेकर दो-दो गाड़ियों को एक ही नंबर जारी कर दिया है. बकायदा रजिस्ट्रेशन संख्या, अॉनर बुक व आरसी कार्ड भी एक ही नंबर का जारी किया गया है. वह भी किसी आम आदमी को नहीं, बल्कि जिले के भाजपा सांसद डाॅ संजय जायसवाल और राजद से लौरिया का चुनाव लड़ चुके रणकौशल प्रताप सिंह को एक ही नंबर दिया गया है. इसके लिए सांसद से 25 हजार रुपये भी लिये गये हैं. हैरत वाली बात यह है कि सालों से सांसद डाॅ जायसवाल व रणकौशल प्रताप इस गाड़ी से चल रहे हैं, लेकिन विभाग बेखबर बना हुआ है. अब खुलासा होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है.

इसका खुलासा उस समय हुआ, जब सांसद डा संजय जायसवाल ने अपनी फार्च्यूनर गाड़ी बीआर 22 जे 0001 को किसी और को बेच दी. लेकिन ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान सांसद को पता चला कि उनके नंबर की एक और गाड़ी बेतिया में पंजीकृत है. बकायदे चल रही है. यह गाड़ी डीटीओ विभाग के रिकार्ड में दर्ज है. यह सुन खुद सांसद भी भौंचक रह गये. इधर, मामले की पड़ताल करने पर पता चला कि सांसद अपनी गाड़ी पर जिस नंबर का प्रयोग कर रहे थे,
वह नंबर वर्ष 2012 से ही राजद नेता व लौरिया से चुनाव लड़ चुके रणकौशल प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू सिंह के नाम से जारी है. बावजूद इसके डीटीओ विभाग ने सांसद की गाड़ी को यह नंबर फिर से जारी कर दिया. जिसका निबंधन सीएम मार्केटिंग कंपनी के नाम पर किया गया. इस मामले का खुलासा होने के बाद परिवहन विभाग में बड़े पैमाने पर वीआइपी नंबर के घोटाला के मामले खुलने लगे हैं. सूत्रों की मानें तो सांसद व राजद नेता के अलावे जिले में कई और हाइ-प्रोफाइल परिवारों की गाड़ियां एक ही नंबर से दौड़ रही हैं. एक निजी बस और बोलेरो के भी सेम नंबर से चलने का मामला सामने आ रहा है. फिलहाल इसको लेकर परिवहन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.
वर्ष 2012 का है मामला, विभाग बेखबर
वीआईपी नंबर के इस घोटाले का मामला वर्ष 2012 से ही चल रहा है. इस बीच तमाम डीटीओ बदले, लेकिन विभाग को कोई खबर नहीं लगी. वह भी तब, जब सांसद की ओर से बीआर 22 जे 0001 नंबर की ओरिजिनल ओनर बुक गायब होने के बाद डुप्लीकेट ओनर बुक के लिए आवेदन दिया गया है. इसके बाद भी विभाग की ओर से डुप्लीकेट ओनर बुक जारी कर दिया गया. फिर भी मामला पकड़ में नहीं आ सका. अब खुलासा होने के बाद डीटीओ दिलीप अग्रवाल का कहना है कि सांसद को नया नंबर दिया जा रहा है. मैनुअल के चलते यह गलती हुई थी.
छह माह पहले सांसद के जरिए इसकी जानकारी मुझे मिली थी. विभाग में मैंने शिकायत की है. मेरी गाड़ी के नंबर का दुरुपयोग किया जा रहा है. यह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा का मामला है. जिला प्रशासन इसको संज्ञान में लेकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करे.
रणकौशल प्रताप सिंह उर्फ गुड्डू सिंह, पूर्व प्रत्याशी राजद
इस मामले को चार बार डीटीओ से बोल चुका हूं. 25 हजार रुपये लेकर मुझे बीआर 22 जे 0001 नंबर दिया गया था. जब मैं गाड़ी बेचने गया, तो मुझे जानकारी हुई कि इस नंबर की किसी और के पास गाड़ी है. एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के बाद भी विभाग ने ऐसी लापरवाही की है. उससे भी बड़ी बात है कि चार बार डीटीओ से कहने के बाद भी दुरुस्त नहीं किया गया है. जब एक सांसद के कहने के बाद विभाग ऐसी सुस्ती कर रहा है तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा.
डा संजय जायसवाल, सांसद पश्चिम चंपारण
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