शहरवासियों में मोतीझील के विकास की जगी उम्मीद

Updated at : 25 Nov 2016 5:12 AM (IST)
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शहरवासियों में मोतीझील के विकास की जगी उम्मीद

पहल. झील के विकास की फिर बनी 110 करोड़ की योजना केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के बाद शुरू हो सकता है कार्य 180 करोड़ की पूर्व से लंबित है रिंग रोड योजना अभी कचरा व जल कुंभी बनी है झील की पहचान चार दशक से सपने संजोये हैं शहरवासी मोतिहारी : केंद्रीय व राज्यस्तरीय टीमों […]

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पहल. झील के विकास की फिर बनी 110 करोड़ की योजना

केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के बाद शुरू हो सकता है कार्य
180 करोड़ की पूर्व से लंबित है रिंग रोड योजना
अभी कचरा व जल कुंभी बनी है झील की पहचान
चार दशक से सपने संजोये हैं शहरवासी
मोतिहारी : केंद्रीय व राज्यस्तरीय टीमों के निरीक्षण, राजनेताओं के घोषणा व आश्वासन के बाद भी नहीं बदली शहर को दो भागों में बांटने वाली मोतीझील की सूरत. नौकायन, सौंदर्यीकरण सहित एक दर्जन योजनाएं बनी, अतिक्रमण भी नहीं हटा, फिर भी शहर वासियों को झील सौंदयीकरण के आश्वासन मिल रहे हैं. हाल में केंद्रीय टीम ने मोतीझील व कररिया झील का निरीक्षण किया है, जो अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगी. योजना करीब 110 करोड़ की है. 1970 के दशक से झील विकास की योजनाएं बन रही है,
जो फाइलों से ऊपर नही निकल सकी है. सिटी डेवलपमेंट के तहत विकास के लिए करीब 200 करोड़ का प्रोजेक्ट भी फाइलों में धूल फांक रहा है. करीब चार किमी व 487 एकड़ में फैले मोतीझील की पहचान कचरा, जलकुंभी, अतिक्रमण व मच्छरों का आशियाना के रूप में हो गयी है.
9.10 एकड़ झील की भूमि पर है
भवन: सरकारी आंकड़ों के अनुसार 246.47 एकड़ में फैले झील किनारे 9.10 एकड़ भू-भाग पर आलीशान मकान बन गये हैं. प्रशासनिक स्तर पर छोटे अतिक्रमणकारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अतिक्रमणकारियों का अंगदी पांव अब भी जमा है. एक वर्ष से यह मामला भी फाइलों में है. इसको लेकर भी मामला न्यायालय में चल रहा है. इधर मत्स्य विभाग 200 एकड़ झील 90 के दशक में स्थानांतरण की बात कहता है. लेकिन 1916 के सर्वे के अनुसार राजस्व विभाग का कहना है
कि झील मौजा बेलबनवा, थाना नंबर 167 के मामले में 158 अतिक्रमणकारियों को चिह्नित किया गया. 93 लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गये जो फिर ठंडे बस्ते में है.
मुख्यमंत्री व कें द्रीय टीम कर चुकी है निरीक्षण: 70 के दशक से केंद्र व राज्य की कई टीमों ने मोतीझील का निरीक्षण किया. पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए. लेकिन 2011 में हुए निरीक्षण व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी द्वारा निरीक्षण कर विकास के लिए निर्देश दिया गया. लेकिन नतीजा अब तक सामने नहीं आया है.
चार रोज पूर्व फिर केंद्रीय टीम ने निरीक्षण किया है. यह बता दे कि झील विकास के लिए 1980 के दशक में सम्मेलन हुआ था. अब झील महोत्सव पर लाखों खर्च होते हैं. 1985 में जो झील के लिए नहर निकाली गयी और सिकरहना नदी से झील तक आने वाली राम रेखा नदी भी अतिक्रमण से गायब हो गयी है.
मोतीझील की वर्तमान स्थिति ़ बगल से गुजरने पर आती है बदबू़
नगर विकास मंत्रालय ने 28 प्रमुख शहरों के विकास की योजना बनायी थी उसमें मोतीझील भी था शामिल
झील के दोनों रिंग रोड बनाने की 180 करोड़ की प्रस्तावित योजना फाइलों में बंद
झील के गंदे पानी व खरपतवार निस्तारण की वैज्ञानिक पद्धति भी नहीं हो सकी पूरी.
शहरी नालों के पानी को साफ कर झील में गिराने की थी योजना
झील के जलकुंभी से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की कवायद रह गयी अधूरी
झील पथ में जर्जर पुल की जगह धनुषाकार पुल निर्माण की योजना विभागीय पेंंच में फंसा
कोलकाता यादवपुर विश्वविद्यालय से केंद्रीय टीम मोतीझील व कररिया झील का निरीक्षण के लिए चार रोज पूर्व आयी थी. निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगी. 110 करोड़ इन झीलों के विकास मे खर्च करने की योजना है. झील के दोनों ओर सड़क का भी निर्माण होगा. नगर परिषद स्तर से भी विकास की योजनायें बनायी जा रही है.
प्रकाश अस्थाना, मुख्य पार्षद, नगर परिषद, मोतिहारी
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