समस्या. शराबबंदी के बाद जिले में नशे की पूर्ति के लिए अपनाया जा रहा नया तरीका

Updated at : 19 Apr 2016 4:35 AM (IST)
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समस्या. शराबबंदी के बाद जिले में नशे की पूर्ति के लिए अपनाया जा रहा नया तरीका

सूंघ रहे सुलेशन, क्लीनर व वाइटनर शराब नहीं मिलने पर नशे के लिए सुलेशन, क्लिनर व वाइटनर सूंघ रहे हैं इसके आदी लोग. वहीं, कई गांजा, भांग एवं कफ सीरफ का सेवन कर रहे हैं. शराब बंदी के कारण ऐसे मरीज इलाज के लिए अस्पताल में भरती भी हो रहे है. इस कारण इन दिनों […]

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सूंघ रहे सुलेशन, क्लीनर व वाइटनर

शराब नहीं मिलने पर नशे के लिए सुलेशन, क्लिनर व वाइटनर सूंघ रहे हैं इसके आदी लोग. वहीं, कई गांजा, भांग एवं कफ सीरफ का सेवन कर रहे हैं. शराब बंदी के कारण ऐसे मरीज इलाज के लिए अस्पताल में भरती भी हो रहे है. इस कारण इन दिनों नशामुक्ति केंद्र में नशे के आदी लोगों की भीड़ बढ़ गयी है.
मोतिहारी : शराब बंदी के बाद नशामुक्ति केंद्र में नशे के आदी लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है. शराब नहीं मिलने से ये लोग बेचैन हैं. नशे के लिए ये सुलेशन, वाइटनर व क्लिनर सूंघ रहे हैं. यही नहीं, कई गांजा-भांग खा रहे हैं तो कई जीवन रक्षक मेडिकेटेड दवाओं का सेवन नशा के लिए कर रहे हैं.
यहां तक की नशे के आदी साबुन तक निगल जा रहे हैं. शराब की लत में डूब चुके इन नशेड़ियों को भला केमिकल के बने सुलेशन व वाइटनर जैसे पदार्थ के सेवन से होनेवाले नुकसान की परवाह नहीं है, लेकिन इसका सेवन उनके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा सकता है. नशे के आदि लोगों के लिए चिकित्सीय सलाह जरूरी है. इसका अनुशरण नशापान की बुरी आदत से मुक्ति दिलाने में कारगर होगी.
मानसिक स्थिति पर असर
शराब छूटने का असर नशापान के आदि लोगों के मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है. इन लोगों को नींद नहीं आ रही है. दिल की धड़कन तेज होना एवं हाथ-पैर की कंपकपी जैसी शिकायत है. मानसिक स्थिति भी सामान्य तौर पर काम नहीं कर रहा.
इलाज के लिए अस्पताल में हो रहे भरती
शराब छूटने के बाद बिगड़ती स्थिति को देख परिजन नशे के आदी लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भरती करा रहे हैं. नशा नहीं करने से नशेड़ियों को भूख की कमी, ज्यादा पसीना आना एवं सुस्त रहने की शिकायत है. स्थिति को देख परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भरती करा रहे हैं.
119 का हो चुका है इलाज
सदर अस्पताल स्थित नशामुक्ति केंद्र पर शराबी एवं नशेड़ियों की भीड़ बढ़ने लगी है. एक अप्रैल से चल रहे इस केंद्र पर एक पखवारे के भीतर करीब 119 मरीजों का ईलाज हुआ है. अधिकांश मरीज में धड़कने तेज होना, ज्यादा पसीना आना एवं नींद नहीं आने की शिकायत मिली है.
भांग, गांजा एवं कफ सीरफ का भी कर रहे सेवन
सेवन से नुकसान
सुलेशन, वाइटनर व क्लिनर – अलग-अलग उपयोग के लिए बनी यह सामग्री बैंजिन कंपाउंड कांपलेक्स व हाइड्रोकॉर्बन का मिश्रण होता है. इसके सेवन से दिमाग की नशे असंतुलित हो जाती हैं.
गांजा-भांग -गांजा-भांग सेवन के आदि लोगों को सीजी फेमिया भी हो जाता है. इसके प्रभाव से सुस्त रहना, आंखें लाल रहना एवं काल्पनिक दुनिया में जीने की शिकायत होती है. ट्रेडा हाइड्रो केनाविनोल केमिकल की मात्रा अधिक होती है. सेवन से सोचने-समझने, स्मरण, ध्यान एवं मस्तिष्क क्षमता प्रभावित होती है.
साबुन-साबुन में कई तरह के जहरीला केमिकल्स होते हैं. इसमें मौजूदा केमिकल्स नशा करनेवालों को अच्छा लगता है. खाने से पाचन तंत्र, लीवर व किडनी खराब होने की संभावना होती है.
कफ सीरप-खांसी के लिए बनी इस मेडिसीन में एंडी हिस्टानुल का मिश्रण रहता है, जिसे अधिक मात्रा में लेने से नींद अच्छी आती है. लगातार अधिक मात्रा में सेवन से लीवर, किडनी एवं फेफड़ा प्रभावित होता है.
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