बाजार में बन रहा डुप्लीकेट चेकबुक !
Updated at : 30 Dec 2015 1:29 AM (IST)
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मेहसी पीएचसी की घटना की जांच में हुआ खुलासा पीएचसी के डुप्लीकेट चेक से लाखों रुपये ट्रांसफर असली चेकबुक अब भी है पीएचसी में उपलब्ध मोतिहारी : आपने बाजार में जाली पैनकार्ड, वोटर आइकार्ड सहित अन्य दस्तावेज बनते देखा या सुना होगा, लेकिन बाजार में अब बैंक का जाली चेकबुक भी बन रहा है. यह […]
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मेहसी पीएचसी की घटना की जांच में हुआ खुलासा
पीएचसी के डुप्लीकेट चेक से लाखों रुपये ट्रांसफर
असली चेकबुक अब भी है पीएचसी में उपलब्ध
मोतिहारी : आपने बाजार में जाली पैनकार्ड, वोटर आइकार्ड सहित अन्य दस्तावेज बनते देखा या सुना होगा, लेकिन बाजार में अब बैंक का जाली चेकबुक भी बन रहा है. यह आपके लिए बिल्कुल नयी खबर है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मेहसी के जेबीएसवाइ योजना के 2.79 लाख रुपये के घालमेल की तहकीकात में जाली चेकबुक का मामला सामने आया है.
पीएचसी मेहसी को पंजाब नेशनल बैंक ने जिस सीरियल नंबर का चेकबुक जारी किया है, ठीक उसी सीरियल नंबर के चेकबुक से जेबीएसवाइ का लाखों रुपये दूसरे के खाते में ट्रांसफर किया गया है. जाली चेकबुक का मामला सामने आने के बाद बैंक अधिकारी से लेकर पुलिस पदाधिकारी तक के कान खड़े हो गये हैं. फिलहाल मेहसी के प्रभारी चिकित्सा प्रभारी एसके झा ने पीएचसी के खाते से किसी भी तरह की निकासी पर रोक लगवा दिया है.
उन्होंने बताया कि पीएचसी के जेबीएसवाइ योजना का पैसा जिस चेकबुक नंबर से दूसरे के खाते में ट्रांसफर किया गया है, उस नंबर का चेकबुक पीएचसी में उपलब्ध है. ऐसे में उस नंबर का दूसरा चेकबुक कहां से आया, यह जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय है. उन्होंने कहा कि बैंक ने पीएचसी को कौन से सीरियल नंबर का चेकबुक जारी किया, यह पीएचसी के एकाउंटेंड या फिर चेकबुक जारी करने वाले बैंक के अधिकारी को ही मालूम रहता है.
अब सवाल यह है कि चेकबुक का सीरियल नंबर दूसरे के पास कैसे पहुंचा. चेकबुक का सीरियल नंबर लीक हुआ भी तो उस नंबर के चेकबुक की डुप्लीकेट कॉपी कहां बनी और किसने बनवायी. उन्होंने कहा कि मामले की प्राथमिकी थाना में दर्ज करा दी गयी है. पुलिस तमाम बिंदुओं पर गहन छानबीन शुरू कर दी है.
जाली चेक बनाने वाला
गिरोह सक्रिय
बैंक का जाली चेक बनाने वाला गिरोह सक्रिय है. पीएचसी मेहसी की घटना से इस बात को काफी बल मिल रहा है. जाली चेकबुक बनाकर बैंक ग्राहकों के खाते से पैसा गायब करने वाले इस गिरोह के सिंडिकेट का तार कई राज्यों में फैला है. फिलहाल पुलिस की जांच में पटना मसौढ़ी के राजकुमार नामक युवक की पहचान हो सकी है. उसकी गिरफ्तारी के बाद सनसनी वारदात को अंजाम देने वाले सिंडिकेट के मास्टर माइंड की पहचान हो सकेगी. मेहसी की पुलिस टीम राजकुमार को पकड़ने पटना जायेगी. राजकुमार के मसौढ़ी पीएनबी के खाते को फ्रीज कर दिया गया है.
पीएचसी व बैंककर्मी जांच के घेरे में
पीएचसी मेहसी को बैंक द्वारा जारी चेकबुक का सीरियल नंबर लीक करने में पीएचसी व बैंककर्मी संदेह के घेरे में हैं. पुलिस का कहना है कि पीएचसी या बैंक से चेकबुक का सीरियल नंबर लीक हुआ होगा. पुलिस यह भी कह रही है कि चेकबुक का डुप्लीकेट कॉपी बना भी है तो बैंक के चेकबुक का कागज बदमाशों के हाथ कैसे लगा. अगर सधारण कागज पर चेकबुक का डुप्लीकेट कॉपी बना भी तो बदमाशों ने बैंक में चेक डाला तो बैंककर्मियों के पकड़ में क्यों नहीं आया. पुलिस को इस घटना में एक बड़े गिरोह के हाथ होने का संदेह है.
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