मोतिहारी : अतीत के पन्नों में दफन हो गया केसरिया लोकसभा क्षेत्र
Author Prabhat khabar digital desk
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सच्चिदानंद सत्यार्थी मोतिहारी : आजादी के बाद पूर्वी चंपारण उस समय के चंपारण के केसरिया को लोकसभा क्षेत्र का दर्जा मिला था. इसमें मुजफ्फरपुर जिले के दो और सारण के दो विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया था. नारायणी नदी (गंडक) के महत्व व छह विस के बीच का केंद्र केसरिया था, जिसे लोकसभा (चार) […]
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सच्चिदानंद सत्यार्थी
मोतिहारी : आजादी के बाद पूर्वी चंपारण उस समय के चंपारण के केसरिया को लोकसभा क्षेत्र का दर्जा मिला था. इसमें मुजफ्फरपुर जिले के दो और सारण के दो विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया था. नारायणी नदी (गंडक) के महत्व व छह विस के बीच का केंद्र केसरिया था, जिसे लोकसभा (चार) का दर्जा मिला था. उस समय मोतिहारी अलग लोकसभा क्षेत्र था. केसरिया का पौराणिक के साथ राजनीति महत्व भी था.
केसरिया की राजनीति से छपरा पुराना, मुजफ्फरपुर, वैशाली और चंपारण की राजनीति प्रभावित होती थी. 1952 में बगहा, बेतिया, मोतिहारी, केसरिया, पुपरी और सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र थे, जहां 1971 के बाद पुपरी को सीतामढ़ी में और केसरिया को समाप्त कर मोतिहारी लोस में शामिल कर दिया गया. इसके बाद केसरिया लोस का इतिहास समाप्त हो गया. केसरिया लोस से पहली बार 1952 में गोरेया कोठी के झूलन सिन्हा कांग्रेस से जीते थे, फिर 1957 में छपरा निवासी द्वारिकानाथ तिवारी जीते. 1962 में सारण मढ़ौरा के भीष्म प्रसाद यादव जीते.
इस बीच केसरिया लोस में भाकपा की जड़ें मजबूत हो चुकी थीं, जहां 1967 में मेदन सिरसिया पूर्वी चंपारण निवासी कमला मिश्र मधुकर (भाकपा) ने कांग्रेस को हरा भाकपा का कब्जा जमाया. 1971 में मधुकर फिर विजयी हुए. परिसीमन के बाद मोतिहारी लोस में मधुकर जेपी लहर में जनता पार्टी के ठाकुर रमापति सिंह से हार गये थे. 1971 तक मोतिहारी लोस में ढाका, घोड़ासहन व मधुबन विस क्षेत्र थे, जो बाद में शिवहर में चला गया. सुगौली, रक्सौल, आदापुर (अब नरकटिया) पूर्व से बेतिया लोस में ही है.
मुजफ्फरपुर और सारण के शामिल थे दो-दो विधानसभा क्षेत्र
केसरिया के पहले सांसद बने थे गोरेया कोठी के झूलन सिन्हा
1952 से 1971 तक अस्तित्व में रहा था केसरिया लोकसभा क्षेत्र
केसरिया को लेकर गूंजती थी आवाज
राजनीतिज्ञ प्रो. चंद्रभूषण पांडेय, कुमार सुरेंद्र कहते हैं कि गंडक नदी से बाढ़ रोधी कार्य, बांध, पंचवर्षीय योजना में भैंसालोटन सिंचाई परियोजना, केसरिया के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की लोस में आवाज गूंजती थी. बताया कि झूलन सिन्हा व उस समय के सांसद मिट्टी से लोटा साफ कर पानी पीते थे. सादा जीवन उच्च विचार पहचान थी.
कहां का कौन विस था केसरिया में
चंपारण (पूचं) केसरिया व पीपरा विधानसभा
मुजफ्फरपुर साहेबगंज व बरूराज विधानसभा
सारण- बैकुंठपुर और तरैया विधानसभा क्षेत्र
कौन कब सांसद
1952-झूलन सिन्हा, कांग्रेस
1957-द्वारिका तिवारी,कांग्रेस
1962-भीष्म
प्रसाद यादव,
कांग्रेस
1967-कमला
मिश्र मधुकर, भाकपा
1971-कमला मिश्र मधुकर, भाकपा
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