गंगा दशहरा पर पावन स्नान को आज होगा जमावड़ा, तैयारी पूरी

Updated at : 04 Jun 2025 10:28 PM (IST)
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गंगा दशहरा पर पावन स्नान को आज होगा जमावड़ा, तैयारी पूरी

गंगा दशहरा का त्योहार गुरुवार को मनाया जायेगा. इस अवसर पर यहां की उतरायणी गंगा में पावन स्नान के लिए राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा उतर प्रदेश व झारखंड से भी लोग पहुंचेंगे.

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बक्सर. गंगा दशहरा का त्योहार गुरुवार को मनाया जायेगा. इस अवसर पर यहां की उतरायणी गंगा में पावन स्नान के लिए राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा उतर प्रदेश व झारखंड से भी लोग पहुंचेंगे. पर्व को लेकर प्रशासनिक अलर्ट जारी कर दिया गया है. रामरेखाघाट समेत ज्यादा भीड़भाड़ वाले घाटों पर दंडाधिकारियों के साथ पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कर दी गयी है. किसी तरह की अनहोनी की संभावना को देखते हुए घाट पर गोताखोरों की तैनाती भी कर दी गयह है. गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को पतित पावन मां गंगा का अवतरण धरा पर हुआ था. सो इस दिन गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन व दान-पुण्य आदि धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माना जाता है. गंगा दशहरा के अवसर पर गुरुवार की शाम गंगा महाआरती का आयोजन किया जाएगा. जिसमें गणमान्य लोगों के अलावा कई धर्माचार्य शिरकत करेंगे. इसकी जानकारी देते हुए रामरेखाघाट गंगा आरती ट्रस्ट के प्रधान पुजारी अमरनाथ पांडेय उर्फ लाला बाबा ने बताया कि आरती व पूजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. इस अवसर पर वैदिक विधि के साथ पहले मां गंगा का पूजन किया जायेगा. इसके बाद गुगुल धूप, घी बत्ती व कपूर आदि सामग्रियों से आरती की जायेगी. दो दिन रखा जायेगा निर्जला एकादशी का व्रत : इस बार निर्जला एकादशी का पर्व दो दिन मनेगा. पहले दिन यानि शुक्रवार को स्मार्त यानि गृहस्थ तथा अगले दिन शनिवार को वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी व्रत रखेंगे. यह पर्व संसार के पालन कर्ता भगवान विष्णु को समर्पित है. इस दिन श्रद्धालु बगैर अन्न-जल चौबीस घंटे का व्रत रखते हैं तथा द्वादशी तिथि में पारण कर व्रत तोड़ते हैं. एक साल में कुल 24 एकादशी का व्रत होता है. जिसमें से ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाले व्रत को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन व्रतियों के लिए अन्न के अलावा जल सेवन भी वर्जित है. इस एकादशी को विधि-विधान के साथ अनुष्ठान करने से अन्य सभी एकादशी के व्रत का फल प्राप्त हो जाता है.

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AMLESH PRASAD

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