परिवारवाद के चक्रव्यूह में उलझा एमएलसी उपचुनाव

Published by :DHARMENDRA KUMAR
Published at :09 May 2026 1:05 PM (IST)
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परिवारवाद के चक्रव्यूह में उलझा एमएलसी उपचुनाव

शाहाबाद में एमएलसी उपचुनाव में दो परिवारों की प्रतिष्ठा दावं पर

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बक्सर के ब्रह्मपुर से संतोष कांत की रिपोर्ट ब्रह्मपुर (बक्सर). एमएलसी उपचुनाव को लेकर शाहाबाद क्षेत्र में इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है. बक्सर-भोजपुर स्थानीय निकाय कोटे की एमएलसी सीट पर होने वाला उपचुनाव दो रसूखदार परिवारों के बीच ”प्रतिष्ठा की लड़ाई” बन गयी है. जेडीयू से कन्हैया कुमार और आरजेडी से सोनू कुमार राय की उम्मीदवारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस रणभूमि में हार-जीत चाहे जिसकी हो, जीत का सर्टिफिकेट ”परिवारवाद” के खाते में ही जायेगा. ठीक है। इसमें सोनू राय के पिता लालदास राय भी एमएलसी रह चुके हैं. राजनीतिक विश्लेषक का कहना है भोजपुर-बक्सर की सीट बाहुबल और धनबल के लिए हमेशा से चर्चित रही है. पार्टियों को लगता है कि ”विरासत” वाले उम्मीदवार चुनावी खर्च और जातीय समीकरणों को बेहतर तरीके से साध सकते हैं. कन्हैया और सोनू, दोनों ही इसी सोच की उपज हैं. पिता की विरासत बनाम नयी दावेदारी सत्ताधारी दल जेडीयू ने कन्हैया कुमार को मैदान में उतारा है. कन्हैया के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पिता के उस विशाल साम्राज्य और जनाधार को समेटे रखने की है, जिसे राधाचरण शाह ने सालों की मेहनत से खड़ा किया है. दूसरी ओर, आरजेडी ने सोनू कुमार राय पर दांव लगाया है. सोनू भी राजनीति में कोई नया नाम नहीं हैं; उनके परिवार का क्षेत्र में पुराना रसूख रहा है. तेजस्वी यादव की रणनीति यहाँ साफ दिख रही है एक ऐसे युवा चेहरे को आगे करना जो न केवल अपने परिवार की विरासत संभाले, बल्कि आरजेडी के एमवाई समीकरण के साथ-साथ अन्य वर्गों में भी सेंधमारी कर सके. पंचायत प्रतिनिधियों पर नजर और महाबंधन का पलटवार चूंकि इस चुनाव में मतदाता आम जनता नहीं, बल्कि त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि (मुखिया, वार्ड सदस्य, बीडीसी और जिला परिषद सदस्य) होते हैं, इसलिए मुकाबला सीधे तौर पर ”मैनेजमेंट” और व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित है. कन्हैया कुमार के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के स्थानीय दिग्गजों का समर्थन एक बड़ा प्लस पॉइंट है. जेडीयू इसे विकास और निरंतरता की जीत बता रही है. आरजेडी के सोनू कुमार राय स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर और ”परिवर्तन” के नारे के साथ आगे बढ़ रहे हैं. उनका तर्क है कि क्षेत्र को अब नयी सोच और ऊर्जा की जरूरत है.

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