बक्सर के नाथबाबा मंदिर में 51 हजार बेलपत्र से हो रहा रुद्राभिषेक, यहां एक साथ हैं भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिग

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शिलानाथ महाराजा | Prabhat Khabar Network

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बक्सर के नाथबाबा मंदिर में सावन के दौरान 12 ज्योतिर्लिंगों और अष्टविनायक के दर्शन का विशेष महत्व है। जानें शिव आराधना से कैसे पूरी होती हैं मनोकामनाएं।

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Sawan 2026 : पवित्र श्रावण मास के अवसर पर बक्सर स्थित श्री आदिनाथ अखाड़ा के नाथबाबा मंदिर में शिवभक्ति, वैदिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक साधना का दिव्य वातावरण बना हुआ है. मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर रहे हैं. महामंडलेश्वर श्री शीलनाथ महाराज ने कहा कि भगवान शिव करुणा, त्याग, वैराग्य और लोककल्याण के प्रतीक हैं तथा निष्काम भाव से की गई उनकी आराधना भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है.

Buxar News : एक ही मंदिर में स्थापित हैं भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग

महामंडलेश्वर ने बताया कि नाथबाबा मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई है. उनके अनुसार मंदिर में प्रतिदिन विद्वान संस्कृत आचार्यों और वैदिक ब्राह्मणों द्वारा 51 हजार बेलपत्र, शमी पुष्प, कमल, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य रुद्राभिषेक किया जा रहा है. इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं.

बारहों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से मिलता है पुण्य

महामंडलेश्वर ने कहा कि नाथबाबा मंदिर में बारहों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन से श्रद्धालुओं के कष्ट दूर होते हैं तथा भगवान शिव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं. सावन में विधि-विधान से शिव पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पापों का क्षय होता है.

अष्टविनायक की प्रतिमाएं भी हैं स्थापित

नाथबाबा मंदिर की एक और विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश के अष्टविनायक स्वरूपों की भी स्थापना की गई है. श्रद्धालु शिव पूजा के साथ प्रथम पूज्य गणेश के अष्टविनायक स्वरूपों का भी दर्शन और पूजन कर रहे हैं. मान्यता है कि अष्टविनायक की आराधना से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं.

सावन का संदेश अपनाने की अपील

महामंडलेश्वर श्री शीलनाथ महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की कि सावन को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखें, बल्कि सत्य, साधना, संयम, सेवा और सदाचार को भी अपने जीवन में अपनाएं. उन्होंने कहा कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता तथा सभी प्राणियों के कल्याण की भावना ही भगवान शिव के संदेश का वास्तविक स्वरूप है.


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Mritunjay Singh

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By Mritunjay Singh

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