बक्सर: तुलसी आश्रम में रामलीला का भव्य शुभारंभ, ‘नारद मोह’ और ‘विश्व मोहिनी स्वयंवर’ का हुआ मंचन

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नाटक का मंचन करते कलाकार

पवित्र सावन मास में तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर में रामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें 'नारद मोह' और 'विश्व मोहिनी स्वयंवर' प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया. बक्सर की प्रसिद्ध रामलीला मंडली द्वारा प्रस्तुत इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और परंपरा का संरक्षण है.

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Buxar Tulsi Ashram: पवित्र सावन मास की सोमवारी एवं प्रदोष के शुभ संयोग पर सोमवार को तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में रामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ. धार्मिक आयोजन से पूरा क्षेत्र रामकथा के जयघोष से गुंजायमान हो उठा. रामलीला का औपचारिक उद्घाटन पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, दक्षिण बिहार के प्रांत संयोजक रामविलास शांडिल्य, तुलसी विचार मंच के अध्यक्ष संतोष सिंह, संयोजक शैलेश ओझा एवं महाकालेश्वर मंदिर न्यास प्रबंधन समिति के पुजारी राजू मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

जीवंत अभिनय ने दर्शकों को किया भावविभोर

रामलीला के प्रथम दिन कलाकारों ने ‘नारद मोह’ एवं ‘विश्व मोहिनी स्वयंवर’ प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया. कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय और संवाद अदायगी के माध्यम से श्रद्धालुओं को रामकथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों से परिचित कराया. इन प्रसंगों को भगवान श्रीराम के पृथ्वी पर अवतरण की पृष्ठभूमि से जुड़ा बताया गया. धार्मिक प्रसंगों के मंचन ने पंडाल में मौजूद दर्शकों को भावविभोर कर दिया.

सावन की पावन शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह की भव्य झांकी भी प्रस्तुत की जाएगी. शिव विवाह की इस विशेष झांकी में भगवान शिव की अनूठी बारात और पारंपरिक विवाह का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा.

बक्सर की प्रसिद्ध मंडली कर रही रामलीला का मंचन

रामलीला का मंचन सुप्रसिद्ध ‘जय बाबा परमेश्वर नाथ रामलीला मंडली, तपोभूमि बक्सर’ के कुशल कलाकारों द्वारा किया जा रहा है. मंडली के प्रमुख कलाकारों में अशोक पांडेय व्यास, रामायण पांडेय, श्रीराम की भूमिका में बिट्टू कुमार, माता सीता की भूमिका में शंभू जी सहित मोहित और गुड्डू मिश्रा शामिल हैं. वहीं ढोलक पर विश्वनाथ दुबे अपनी थाप से संगत कर रहे हैं.

संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का प्रयास

तुलसी आश्रम की पावन धरती पर आयोजित इस रामलीला को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में उत्साह है. आयोजकों के अनुसार, धार्मिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य रामकथा के आदर्श प्रसंगों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं विलुप्त हो रही पारंपरिक लोकनाट्य कला को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है.


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संतोष कांत

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By संतोष कांत

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