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अक्षय नवमी पर महिलाओं ने आंवला वृक्ष की पूजा, परिक्रमा कर किया प्रसाद ग्रहण

Updated at : 30 Oct 2025 10:50 PM (IST)
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अक्षय नवमी पर महिलाओं ने आंवला वृक्ष की पूजा, परिक्रमा कर किया प्रसाद ग्रहण

गुरुवार को प्रखंड की विभिन्न क्षेत्रों में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला वृक्ष की पूजा की गयी.

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डुमरांव. गुरुवार को प्रखंड की विभिन्न क्षेत्रों में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला वृक्ष की पूजा की गयी. इस संबंध में पंडित कमलेश पाठक ने बताया कि इसे आरोग्य नवमी, अक्षय नवमी, कूष्मांड नवमी के नाम से जाना जाता है. गुरुवार को इलाके के विभिन्न मंदिर परिसर में आंवला वृक्ष के समीप पूजा-अर्चना के बाद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया. प्रखंड के विभिन्न हिस्सों में जिसे जहां आंवला वृक्ष मिला, वहीं पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया. पंडित कमलेश पाठक ने बताया कि किदवंती की मानें तो अक्षय नवमी पर जो भी पुण्य किया जाता है उसका फल कई जन्मों तक समाप्त नहीं होता. इस दिन दान, पूजा, भक्ति जहां तक संभव हो व अपनी सामर्थ्य के अनुसार अवश्य करें. उसी तरह यदि आप शास्त्रों के विरुद्ध कोई काम करते हैं तो उसका पाप भी कई जन्मों तक किसी न किसी रूप में भुगतना पड़ता है. इसलिए ध्यान रखें कि ऐसा कोई काम न करें, आंवला नवमी के दिन सुबह नहाने के पानी में आंवले का रस मिलाकर स्नान करना बेहतर माना गया है. ऐसा करने से आसपास में जितनी भी नेगेटिव ऊर्जा होती है, वह समाप्त हो जाती है और सकारात्मकता में बढ़ोतरी होती है. अक्षय नवमी के अवसर पर आंवला पेड़ की पूजा करने का विधान है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु एवं शिव जी वृक्ष में आकर निवास करते हैं. इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्नदान करने का बहुत महत्व होता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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