Buxar News : चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की हुई पूजा-अर्चना

Published by : SHAH ABID HUSSAIN Updated At : 02 Apr 2025 10:26 PM

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चैत्र नवरात्र के चौथे दिन नगर सहित प्रखंड के विभिन्न गावों में चारों तरफ भक्ति भाव का माहौल बना रहा, जहां सुबह होते ही भक्ति के माहौल के साथ गलियों में चहल-पहल शुरू हो गयी थी. इस दौरान नगर स्थित विभिन्न देवी मंदिरों सहित प्रखंड के मठिला, कोपवां, कोरानसराय तथा विभिन्न गांवों के मंदिरों में अहले सुबह से ही मां की आराधना में भक्त लगे रहे.

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डुमरांव. चैत्र नवरात्र के चौथे दिन नगर सहित प्रखंड के विभिन्न गावों में चारों तरफ भक्ति भाव का माहौल बना रहा, जहां सुबह होते ही भक्ति के माहौल के साथ गलियों में चहल-पहल शुरू हो गयी थी. इस दौरान नगर स्थित विभिन्न देवी मंदिरों सहित प्रखंड के मठिला, कोपवां, कोरानसराय तथा विभिन्न गांवों के मंदिरों में अहले सुबह से ही मां की आराधना में भक्त लगे रहे. वहीं घरों में की गयी कलश स्थापना के सामने मां कुष्मांडा के पूजन के लिए श्रद्धालु पूजा-पाठ में जुटे रहे, जहां शुभ मुहूर्त को देखकर भक्त विधि-विधान के साथ अपने परिवार में खुशहाली तथा अच्छे स्वास्थ्य और यश, बल तथा लंबी उम्र की प्राप्ति के लिये मां कुष्मांडा की पूजा कर रहे थे. वहीं कोपवां गांव स्थित प्रसिद्ध मां काली मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है, मंदिर समिति के सदस्य प्रिंस सिंह ने बताया कि चैत्र नवरात्र में यहां के प्रसिद्ध मां काली मंदिर में अहले सुबह से देर शाम तक प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रही है, जहां शाहाबाद की विभिन्न जगहों से लोग मां काली के दर्शन करने आ रहे हैं. इस दौरान महिला श्रद्धालुओं ने बताया कि नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा विधि के साथ शुभ मुहूर्त में करने से लाभ मिलता है. महिला भक्तों ने कहा कि आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है और नवरात्र का चौथा दिन है, परिवार में खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यश, बल तथा लंबी उम्र की प्राप्ति के लिए मां कुष्मांडा की पूजा करनी चाहिए. महिला भक्तों ने बताया कि मां कुष्मांडा मां दुर्गे की चौथा स्वरूप हैं. मां की आठ भुजाएं होने के कारण इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है. इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा नजर आता है, जबकि आठवें हाथ में जप की माला होती है. मां कुष्मांडा का वाहन सिंह है और इनका निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि देवी कुष्मांडा सूर्य देव को दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं. इसके साथ ही भक्त अपने अच्छे स्वास्थ्य और यश, बल, परिवार में खुशहाली के साथ-साथ आयु की वृद्धि के लिए मां कुष्मांडा का ध्यान करके अपने परिवार की खुशहाली पाते हैं. लोगों ने कहा कि नवरात्र के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा सच्चे मन से करना चाहिए, फिर मन को अनहत चक्र में स्थापित करने के लिए मां का आशीर्वाद लेना चाहिए.

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