जलजमाव और बदहाल सड़कों ने छीनी राहगीरों की राहत, कृष्णाब्रह्म-चक्की सड़क जर्जर

बारिश की बूंदें जब खेतों को हरियाली से भर देती हैं, तो किसान की मुस्कान खिल उठती है, लेकिन यही बरसात जब बदहाल सड़कों से होकर गुजरती है, तो ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन जाती है.
संक्रमण और बीमारियों का डर बना साया : सड़क पर फैले जलजमाव ने केवल आवागमन को बाधित नहीं किया, बल्कि अब यह क्षेत्र संक्रमण और दुर्गंध से भी जूझ रहा है. गड्ढों में जमा पानी अब सड़ने लगा है, जिससे तेज बदबू फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का डर लोगों के सिर पर मंडरा रहा है. स्थानीय महिलाएं कहती हैं कि रात को तो इस रास्ते से गुजरना संभव ही नहीं, और दिन में भी हर समय डर बना रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाये. बच्चों को स्कूल भेजना भी अब जोखिम भरा काम हो गया है.
विकास की सच्चाई बयान करती सड़क : यह मार्ग टुडिगंज रेलवे स्टेशन और एनएच-922 पटना-बक्सर हाईवे तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है. इसके जरिये न केवल चक्की और भरियार जैसे गांव, बल्कि आसपास के कई अन्य गांव भी जुड़े हुए हैं. बावजूद इसके, विकास के दावों की असली तस्वीर इस सड़क पर साफ देखी जा सकती है. ग्रामीण प्रियांशु सिंह ने बताया कि हाल की मूसलाधार बारिश ने इस सड़क की जर्जरता की परतें उधेड़ दी है. विकास की योजनाएं, घोषणाएं सब कुछ इस दलदल में धंसा प्रतीत हो रहा है. ऐसा लगता है जैसे विभागीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता ने गांवों को उनके हाल पर छोड़ दिया हो.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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