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एसपीजीआरओ के निरीक्षण में रोस्टर के अनुसार नहीं मिले डाक्टर

Updated at : 11 Sep 2024 10:26 PM (IST)
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एसपीजीआरओ के निरीक्षण में रोस्टर के अनुसार नहीं मिले डाक्टर

अनुमंडल अस्पताल में बुधवार को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी (एसपीजीआरओ) कृष्ण कुमार ने डीएम के निर्देशानुसार निरीक्षण किया.

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डुमरांव.

अनुमंडल अस्पताल में बुधवार को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी (एसपीजीआरओ) कृष्ण कुमार ने डीएम के निर्देशानुसार निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान बच्चे के डाक्टर नहीं थे, इसके अलावे रोस्टर के अनुसार एक डाक्टर नहीं मिलें, उनके जगह पर कोई दूसरे डाक्टर ड्यूटी कर रहे थे. वहीं निरीक्षण के दौरान अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ गिरीश कुमार व अस्पताल प्रबंधक देवेन्द्र तिवारी नहीं थे. एसपीजीआरओ ओपीडी, रजिस्ट्रेशन कांउटर, लैब, दवा कांउटर, महिला ओपीडी, अल्ट्रासाउंड, आपातकालीन विभाग, लेबर रूम सहित साफ-सफाई का निरीक्षण किया. ओपीडी में डाॅ शिव कुमार चौधरी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सुमित सौरभ, महिला ओपीडी में डाॅ श्रूति प्रकाश, दंत चिकित्सक डाॅ जुनैद अख्तर खान अपने-अपने कक्ष में तैनात दिखें. बच्चे के ओपीडी में ताला बंद पाया गया, डाॅक्टर भी नहीं थे. वहीं रोस्टर के अनुसार डाॅ अजीत किशोर का ड्यूटी था, लेकिन उनके जगह पर डाॅ शिव कुमार चौधरी ओपीडी में मिलें. बता दें इससे पहले एसडीओ राकेश कुमार के निरीक्षण में डाॅ शिव कुमार चौधरी के जगह डाॅ शिव कुमार चौधरी ड्यूटी पर मिले थे. इस दौरान एसडीओ ने नाराजगी जाहिर किया था. उन्होंने उपाधीक्षक से स्पष्ट कहा था रोस्टर बदलता रहता है क्या ? इस पर उपाधीक्षक ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था. निरीक्षण के दौरान लेबर रूम में पहुंचे, जहां जीएनएम उमा कुमारी व श्वेता कुमारी मौजूद रहीं. बताया गया कि तीन प्रसूति है, जिनमें दो का डिलेवरी हो गया है, एक का होना शेष है. लेबर रूम के निरीक्षण कर लौट रहे तो देखा अस्पताल परिसर में कूड़े का अंबार लगा हुआ है. वहीं आपातकालीन विभाग के पुरूष शौचालय के मुख्य गेट पर दरवाजा है, लेकिन अंदर शौच वाले कक्ष में दरवाजा नहीं रहने से मरीज व उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसके बारे में भी कर्मियों ने जानकारी दी. वहीं अस्पताल परिसर में टंगे जीएनएम रोस्टर में इमरजेंसी वाला मिटा दिखा, इसको भी रिर्पोट करने की बात कही. भले ही डीएम अंशुल अग्रवाल अस्पताल की व्यवस्था में सुधार को लेकर निर्देशित किया हो, लेकिन लगातार जांच के बावजूद अस्पताल की व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा होना लाजिमी है. क्योंकि हर बार निरीक्षण में पहुंचे अधिकारियों को कभी रोस्टर के अनुसार डाक्टर नहीं, तो कभी अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था सामने खड़ा दिख जाता है. डीएम के द्वारा अस्पताल निरीक्षण का जिम्मा तीन अधिकारियों को दिया गया है. जांच के दौरान एसडीओ राकेश कुमार व एसपीजीआरओ अक्सर दिखते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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