Buxar News: अचानक बदलता मौसम खेती में बन रहा बाधक

Updated at : 02 Mar 2025 9:58 PM (IST)
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Buxar News: अचानक बदलता मौसम खेती में बन  रहा बाधक

प्रखंड के विभिन्न गांव में पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की ओर मुड़े किसानों के सामने काफी चिंता का विषय बन गया है.

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राजपुर

. प्रखंड के विभिन्न गांव में पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की ओर मुड़े किसानों के सामने काफी चिंता का विषय बन गया है. पिछले कई वर्षों से किसान आधुनिक खेती के तहत मेंथा, मशरूम, प्याज के साथ कई अन्य फसलों का व्यापक पैमाने पर खेती कर रहे थे.

क्षेत्र के बन्नी, अकोढ़ी, हरपुर, हंकारपुर, मंगराव, संगराव, भलुहा, उत्तमपुर के अलावा अन्य गांव में व्यापक पैमाने पर मेंथा की खेती की जा रही थी. किसानों को भी आर्थिक उन्नति हो रही थी. किसानों को एक उम्मीद थी कि अब आर्थिक हालात अच्छा हो जायेंगे. बदलते मौसम एवं जलवायु परिवर्तन ने किसानों को मायूस बना दिया. विगत चार वर्षों से अनियमित मानसून आने से कई सभी फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ा है. अधिक पानी या सूखे की मार से किसान आर्थिक तंगहाली में जी रहे है. सिंचाई के अभाव में मेंथा की खेती करने वाले किसानों ने खेती ही करना छोड़ दिया है. जिन किसानों ने बटाई पर खेती लिया था. वह किसान कर्ज के बोझ से लद गए. विगत तीन वर्षों से बढ़ते तापमान व भयंकर सूखे की चपेट में आने से खेती पर अधिक असर पड़ा है. किसानों के सामने एक गंभीर समस्या हो गयी है. किसानों ने मेंथा का खेती तो पूरी तरह से बंद कर दिया. इस बार समय पर धान कटनी होने के बाद क्षेत्र में गेहूं फसल समय पर बुवाई किया गया है. लगातार मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव से इस बार एक महीने के अंदर ही कई बार फसलों की सिंचाई करनी पड़ गयी है. फिर भी अभी तक इसमें गेहूं के अच्छे दाने नहीं बन पा रहे हैं. सबसे अधिक चना की फसल पर बुरा असर पड़ गया है. जिन किसानों ने एक उम्मीद के साथ खेतों में चना की बुवाई किया था. प्याज का फसल भी बढ़ते तापमान से प्रभावित होने की संभावना बढ़ गयी है. इस बार किसानों को एक नई उम्मीद थी कि बेहतर खेती कर कोई नया काम करेंगे. एक बार फिर जलवायु में हो रहे परिवर्तन ने किसानों की बेचैनी बढ़ा दी. क्षेत्र के प्रगतिशील किसान अंकित सिंह, मनोज कुमार सिंह, रिंकू सिंह,मिथिलेश कुमार,शंकर पांडेय ने बताया कि अगर किसानों को जलवायु अनुकूल खेती के साथ सिंचाई की व्यवस्था मौजूद हो तो खेती करना अच्छा हो सकता है. फिलहाल खेती करने से अधिकतर किसान डर गए हैं. किसान पारंपरिक खेती के सहारे जैसे जैसे तैसे जीवन यापन करने में लगे हुए हैं.

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