क्या बक्सर का बदलेगा नाम?, संत-महंतों ने एक स्वर में उठाई मांग
फोटो- दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घघाटन करते संत समाज | Prabhat Khabar Network
बक्सर को सिद्धाश्रम नाम देने के लिए संतों ने छेड़ी मुहिम। धार्मिक गौरव लौटने और पर्यटन व रोजगार के अवसर बढ़ने की जताई उम्मीद। जानिए पूरी खबर।
Buxar News : ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी बक्सर का नाम बदलकर ‘सिद्धाश्रम’ करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. भाजपा की वरिष्ठ नेत्री वर्षा पांडेय की ओर से इसे गैर-राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. अभियान को गति देने के लिए नगर स्थित बसांव मठ परिसर में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिले के प्रमुख मठों, मंदिरों और आश्रमों के संत-महंतों ने हिस्सा लिया. संत समाज ने एक स्वर में बक्सर का नाम सिद्धाश्रम करने का समर्थन करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से इस दिशा में पहल करने की मांग की.
वेद-पुराणों में सिद्धाश्रम और व्याघ्रसर नाम का उल्लेख
संवाद के दौरान संतों ने कहा कि ‘बक्सर’ शब्द का स्पष्ट शाब्दिक अर्थ सामने नहीं आता है. धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इस क्षेत्र के नाम समय-समय पर बदलते रहे हैं. संतों ने दावा किया कि इस क्षेत्र के करीब पांच अलग-अलग नामों से संबोधित किये जाने के प्रमाण मिलते हैं. वेद, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में इस क्षेत्र का उल्लेख व्याघ्रसर और सिद्धाश्रम के नाम से किये जाने की बात कही गयी.
भगवान विष्णु और श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं का दिया हवाला
संतों ने बक्सर की धार्मिक महत्ता बताते हुए कहा कि मान्यता के अनुसार यह वही पवित्र भूमि है, जहां भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया था. भगवान श्रीराम के प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने की मान्यता भी इस क्षेत्र से जुड़ी है. संतों ने कहा कि 88 हजार ऋषियों ने यहां तपस्या की थी. ऐसे में इस क्षेत्र को उसके प्राचीन नाम सिद्धाश्रम से पहचान दिलाना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है.
सिद्धाश्रम नाम से धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
संत समाज ने कहा कि नाम परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं होगा, बल्कि इसका क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी प्रभाव पड़ सकता है. बक्सर को सिद्धाश्रम नाम मिलने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है.
रामायण सर्किट से जोड़ने में मिलेगी मदद
कार्यक्रम में संतों ने कहा कि सिद्धाश्रम नाम मिलने से बक्सर को रामायण सर्किट से जोड़ने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है. इससे बक्सर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी. संतों ने ऋषियों की तपस्थली के विकास और बक्सर के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
अभियान को राजनीति से ऊपर रखने की अपील
कार्यक्रम में संतों ने वर्षा पांडेय की ओर से शुरू किये गये अभियान की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह अभियान धार्मिक और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए इसे राजनीति से ऊपर रखकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए. संतों ने अभियान को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर सहयोग करने और जनजागरण चलाने की बात कही.
केंद्र और राज्य सरकार से नाम बदलने की मांग
संत-महंतों ने केंद्र और राज्य सरकार से धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर बक्सर का नाम सिद्धाश्रम करने की मांग की. कार्यक्रम के अंत में मौजूद लोगों ने संकल्प लिया कि अभियान को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाया जायेगा तथा बक्सर को उसकी प्राचीन पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास किया जायेगा.
ये धर्माचार्य रहे शामिल
कार्यक्रम में बसांव पीठाधीश 1008 श्री अच्युतप्रपंनाचार्य जी महाराज, श्री आदिनाथ अखाड़ा के शीलनाथ बाबा, श्री रामजानकी आश्रम के महंत श्री राजाराम बाबा, त्रिदंडी समाधिस्थल, श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के त्यागी बाबा, अहिरौली वरदराज मठ के श्री मधुसूदनाचार्य जी, रामानुजकोट लक्ष्मीनारायण मंदिर के श्रीमन नारायण मिश्रा जी, बड़ी मठिया के महंत श्री श्यामा दास जी, श्री रामानंद तिवारी, श्री रामनाथ ओझा जी, श्री भोला बाबा जी, श्री आचार्य नारायण उपाध्याय जी, श्री कृष्णानंद शास्त्री पौराणिक, विहिप अध्यक्ष श्री सिद्धनाथ मिश्र जी, श्री कन्हैया पाठक जी, साहित्यकार एवं प्रो. अरुण मोहन भैरवी जी, राजबिहारी ओझा जी, गिरीश पांडे जी, वार्ड पार्षद संतोष उपाध्याय, वार्ड पार्षद संगीता सिंह जी, साहित्यकार धन्नूलाल जी, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष बबन उपाध्याय जी, वामन चेतन मंच के अध्यक्ष मृत्युंजय तिवारी, रेडक्रॉस सचिव श्रवण तिवारी समेत विद्वत परिषद, लेखक, इतिहासकार, चिकित्सक, शिक्षक और समाजसेवी संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे.

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