बक्सर दियारा के खूनी खेल का ‘द एंड’! सैटेलाइट मैपिंग से 3 साल में अपडेट होगा रिकॉर्ड
सांकेतिक तस्वीर
Buxar Land Record Mapping : बक्सर में जमीन विवाद खत्म करने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, अब हर 3 साल में भूमि रिकॉर्ड अपडेट होगा. सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग के जरिए दियारा क्षेत्र की जमीन का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा नई व्यवस्था से अवैध कब्जा, फर्जी रजिस्ट्री और भू-माफियाओं पर लगाम लगने की उम्मीद है. भूमि वर्गीकरण पंजी लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कोर्ट में लंबित मामलों में कमी आएगी.
Buxar Land Record Mapping : (संतोष कांत ) बक्सर जिले में वर्षों से चलते आ रहे जमीन विवाद, अवैध कब्जा और ‘खूनी खेल’ पर अब स्थायी ब्रेक लगने की उम्मीद जगी है. राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए सभी अंचलों में ‘भूमि वर्गीकरण पंजी’ तैयार करने और हर तीन साल में इसकी अनिवार्य समीक्षा का निर्णय लिया है. इस नई व्यवस्था का सबसे व्यापक असर बक्सर जिले में देखने को मिलेगा. जिले के सभी 11 अंचलों में हाई-टेक सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग के जरिए डिजिटल लैंड मैप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे जमीन की सही स्थिति और स्वामित्व का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा.
दियारा की ‘अशांत भूमि’ पर लगेगा विराम
बक्सर का दियारा क्षेत्र, खासकर ब्रह्मपुर, चक्की, सिमरी और बक्सर सदर अंचल, हर साल गंगा की बदलती धारा के कारण नई जमीन के उभरने और डूबने का गवाह बनता है. इसी जमीन पर कब्जे को लेकर हर साल विवाद, मारपीट और कई बार गोलीबारी तक की नौबत आ जाती है. पुराने और अधूरे राजस्व रिकॉर्ड के कारण प्रशासन के पास भी यह स्पष्ट नहीं होता कि जमीन सरकारी है या किसी रैयत की. अब सैटेलाइट मैपिंग के जरिए हर इंच जमीन का जीपीएस कोऑर्डिनेट दर्ज किया जाएगा, जिससे विवाद की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी.

भू-माफियाओं के खेल पर लगेगी लगाम
नई डिजिटल प्रणाली के लागू होने के बाद किसी भी बाहुबली या भू-माफिया के लिए सरकारी या लावारिस जमीन पर कब्जा करना आसान नहीं होगा. जैसे ही कोई संदिग्ध जमीन की रजिस्ट्री की कोशिश होगी, सिस्टम उसे तुरंत ब्लॉक कर देगा. इससे जमीन की धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लगने की उम्मीद है.

गोचर और जल निकायों को मिलेगा स्थायी संरक्षण
चौसा, इटाढ़ी और राजपुर जैसे क्षेत्रों में तालाब, नहर (पईन) और चरागाह (गोचर भूमि) पर वर्षों से अवैध कब्जे की शिकायतें रही हैं. नई ‘भूमि वर्गीकरण पंजी’ में इन सभी जमीनों को जल निकाय और सार्वजनिक भूमि की श्रेणी में स्थायी रूप से दर्ज कर दिया जाएगा. डिजिटल मैपिंग के बाद इन जमीनों में किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं होगी.
इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के विवाद होंगे खत्म
चौसा क्षेत्र में पावर प्लांट, रेलवे कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के कारण भूमि अधिग्रहण को लेकर कई बार विवाद और आंदोलन हुए हैं. अब हर तीन साल में होने वाले रिव्यू से जमीन की श्रेणी समय-समय पर अपडेट होती रहेगी. इससे मुआवजा तय करने में पारदर्शिता आएगी और किसान-प्रशासन के बीच टकराव कम होगा.
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कोर्ट में लंबित मामलों में आएगी भारी कमी
फिलहाल बक्सर में भूमि विवाद से जुड़े हजारों मामले कोर्ट और अंचल कार्यालयों में लंबित हैं. नई डिजिटल प्रणाली लागू होने और रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर से लिंक होने के बाद फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, जिससे आने वाले समय में ऐसे मामलों में करीब 70% तक कमी आने का अनुमान है.
7 श्रेणियों में होगा जमीन का वर्गीकरण
बक्सर जिले के सभी 11 अंचलों-बक्सर, चौसा, राजपुर, इटाढ़ी, डुमरांव, सिमरी, चक्की, ब्रह्मपुर, केसठ, नावानगर और चौगाईं में विशेष कैंप लगाकर जमीन का सर्वे किया जाएगा. जमीन को सात प्रमुख श्रेणियों-आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि, सरकारी/सार्वजनिक, वन भूमि और जल निकाय-में वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे हर जमीन का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा.
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
यह नई व्यवस्था न सिर्फ जमीन विवादों को खत्म करेगी, बल्कि पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी. अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो बक्सर में ‘जमीन के खूनी खेल’ का अंत लगभग तय माना जा रहा है.
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By Ragini Sharma
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