चार साल बाद खुला डुमरांव अस्पताल का एमएनसीयू वार्ड, नवजातों को मिलेगी राहत

Published by :kumarsuryakant
Published at :06 May 2026 7:09 PM (IST)
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डूमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट

Buxar News: बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार एमएनसीयू (मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट) वार्ड का ताला खुल गया. जिससे नवजात शिशुओं को यहां ऑक्सीजन सपोर्ट, वार्मर, फोटोथेरेपी (पीलिया के इलाज हेतु), नेबुलाइजर और जरूरत पड़ने पर वेंटिलेशन जैसी सेवाएं दी जा सकेगी.

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Buxar News: डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार एमएनसीयू (मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट) वार्ड का ताला खुल गया है. चार वर्षों से बंद पड़ी यह महत्वपूर्ण सुविधा अब नवजात शिशुओं और प्रसूताओं के लिए जीवनरक्षक साबित होने की उम्मीद जगा रही है. हाल ही में दूसरे शिशु रोग विशेषज्ञ की प्रतिनियुक्ति के साथ इस वार्ड को नियमित रूप से संचालित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.

हॉस्पिटल में पहले से कार्यरत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार के साथ अब पीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी प्रसाद की भी एमएनसीयू में ड्यूटी तय कर दी गई है. उन्हें सप्ताह में तीन दिन-मंगलवार, गुरुवार और शनिवार-सेवाएं देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इससे अब सप्ताह के अधिकांश दिनों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता तय हो गई है, जो नवजात बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए बेहद जरूरी है.

पहले रेफर करने की थी मजबूरी

डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 20 प्रसव होते हैं. पहले एमएनसीयू वार्ड बंद रहने के कारण कॉम्प्लिकेटेड मामलों में नवजातों और प्रसूताओं को तुरंत किसी दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था. इससे समय की बर्बादी होती थी और परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता था. अब इस वार्ड के चालू होने से गंभीर नवजातों को यहीं पर इलाज मिल सकेगा और रेफरल की संख्या में कमी आएगी.

चार साल पहले बना था भवन

ध्यान देने वाली बात यह है कि एमएनसीयू भवन का निर्माण लगभग चार साल पहले ही पूरा हो गया था, लेकिन जरूरी संसाधनों और चिकित्सकों की कमी के कारण यह शुरू नहीं हो पाया था. यहां तक कि चुनाव के दौरान इसका उद्घाटन भी कर दिया गया था, जबकि वास्तविक सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं. इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा था.

प्रशासनिक प्रयास और जनदबाव का असर

इस सुविधा को चालू कराने में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अहम भूमिका रही. डीएम और सिविल सर्जन के प्रयासों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर लगातार उठ रही आवाजों और जनदबाव ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. समाजसेवियों द्वारा ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है.

क्या हैं एमएनसीयू की सुविधाएं ?

एमएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं. यहां ऑक्सीजन सपोर्ट, वार्मर, फोटोथेरेपी (पीलिया के इलाज हेतु), नेबुलाइजर और जरूरत पड़ने पर वेंटिलेशन जैसी सेवाएं दी जाती हैं. समय से पहले जन्मे या बीमार नवजातों को विशेषज्ञ के निगरानी में रखा जाता है. अब इस वार्ड के शुरू होने से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि नवजात मृत्यु दर में कमी आएगी और प्रसव के कॉम्प्लिकेटेड केसों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा. हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमितता और जिम्मेदारी पर निर्भर करेगी.

बक्सर, डुमरांव: सुजीत कुमार ओझा की रिपोर्ट

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