ठंड के कहर से बच्चे व बूढ़े परेशान

Updated at : 05 Jan 2017 6:55 AM (IST)
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ठंड के कहर से बच्चे व बूढ़े परेशान

कै- दस्त को न करें नजरअंदाज, शीघ्र चिकित्सक से परामर्श लें डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं बक्सर : बढ़ती ठंड हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है, तमाम बीमारियां ठंड में प्रभाव दिखाना शुरू कर देती हैं. कारण तापमान कम और हवा में नमी का होना है. इसमें मरीज को […]

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कै- दस्त को न करें नजरअंदाज, शीघ्र चिकित्सक से परामर्श लें

डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं
बक्सर : बढ़ती ठंड हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है, तमाम बीमारियां ठंड में प्रभाव दिखाना शुरू कर देती हैं. कारण तापमान कम और हवा में नमी का होना है. इसमें मरीज को सिरदर्द, थकान, बुखार होने के साथ ही नाक में स्राव होता है.
गले में खराश तो सर्दियों में आम बात है, जो महज वायरस से होनेवाली बीमारी है. ठंड के मौसम में आमतौर पर सर्दी जुकाम के साथ ही नीमोनिया, ब्रांकाइटिस जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं.
सर्दियों में स्वस्थ रहना है, तो अपना खान-पान ठीक रखें, पूरी नींद लें और थोड़ा व्यायाम करें. सर्दियों का प्रभाव ज्यादातर बच्चे एवं बूढ़ों पर दिखता है, जिन्हें थोड़ी असावधानी होने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं शरीर पर हावी हो जाता है.
सदर अस्पताल के आयुष चिकित्सक पीसी प्रसाद ने ठंड में होनेवाली बीमारी एवं बचाव पर विस्तार से चर्चा की.
जुकाम एवं खांसी
ठंड के मौसम में हमारे शरीर के तापमान में भी गिरावट हो जाती है, जिससे जुकाम, खांसी एवं गले में खराश हो जाती है. ऐसे में कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम खाने से खांसी और बढ़ सकती है. साइनस की समस्या हो तो धूल मिट्टी से बचें. ठंड में बाहर जाते समय गर्म कपड़ा पहनने के साथ सिर और गला हमेशा ढक कर रखें.
ब्रांकाइटिस
पांच साल से कम उम्र के बच्चों को ब्रांकाइटिस की समस्या अधिक होती है. ऐसे में मरीज़ को सांस लेने में तकलीफ के साथ खांसी भी होती है, जो कर्इ हफ्तों तक रहती है. बच्चों में ब्रांकाइटिस के कारण बुखार भी हो जाता है. बुखार के साथ ही सीने में दर्द और खांसते समय मुंह से खून आता है, तो चिकित्सक से मिलने में देर नहीं करनी चाहिए.
सिरदर्द
सिर में ठंड लग जाने एवं शरीर मे पानी की कमी से सिरदर्द हो सकता है. सर्दियों में या ठंडी जगह पर यात्रा करने के दौरान सिर को ढक कर रखें. सर्दियों में भी कम- से- कम आठ गिलास पानी जरूर पीएं.
दमा या अस्थमा
ठंडी हवाएं दमा के लक्षणों को गंभीर बना सकती हैं. जैसे सांस लेने में बहुत तकलीफ होना. दमा के मरीजों को अपने साथ हमेशा दमा की दवाएं रखनी चाहिए.
गठिया या हड्डियों में दर्द
जिन लोगों को गठिया होता है, उन्हें ठंड में अधिक परेशानी होती है. ऐसे में सर्दियों से बचाव और थोड़ा व्यायाम कारगर साबित हो सकता है.
हृदयाघात
हृदयाघात या हार्ट अटैक की समस्या सर्दियों में ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने के कारण होती है. ब्लड प्रेशर के बढ़ जाने से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हृदयाघात हो सकता है.
इन्फ्लूएंजा
छह महीने से दो साल तक के बच्चों में इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है, इसके कारण बच्चों में थकान, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होता है. इन्फ्लूएंजा की गंभीर स्थितियों में निमोनिया भी हो सकता है.
आरएसवी रेस्पायरेटरी सिनसायशियल वायरस
यह बीमारी बुजुर्गों और नवजात शिशुओं के लिए यह समस्या अधिक गंभीर होती है.
ऐसी स्थिति मे नवजात शिशु के लिए नीमोनिया का कारण भी बन सकती है. यह बहुत ही संक्रामक रोग है और इसके वायरस मरीज़ के खांसने या छींकने से फैल जाते हैं.
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