एक सफाईकर्मी के जिम्मे 300 घर

Published at :05 Oct 2016 3:17 AM (IST)
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एक सफाईकर्मी के जिम्मे 300 घर

व्यवस्था पंगु. चार लाख 49 हजार हर माह हो रहे खर्च, पर नहीं दिख रही सफाई शहर में घरों से कचरा उठाव का काम नगर पर्षद ने सितंबर माह से एक निजी कंपनी के हाथों सौंपा है. कार्य शुरू होने के बीस दिनों बाद भी कंपनी के सफाई कर्मी घरों तक कचरा उठाव के लिए […]

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व्यवस्था पंगु. चार लाख 49 हजार हर माह हो रहे खर्च, पर नहीं दिख रही सफाई

शहर में घरों से कचरा उठाव का काम नगर पर्षद ने सितंबर माह से एक निजी कंपनी के हाथों सौंपा है. कार्य शुरू होने के बीस दिनों बाद भी कंपनी के सफाई कर्मी घरों तक कचरा उठाव के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं. दरअसल गलती सफाई कर्मियों की नहीं है, बल्कि कंपनी ने 10 हजार घरों के लिए महज 50 सफाई कर्मी ही बहाल किये हैं, जिससे परेशानी हो रही है.
बक्सर : डोर-टू-डोर कचरा उठाव का कार्य नगर में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है. कचरा उठाव के लिए सफाई कर्मी नियमित रूप से घर पर नहीं पहुंच पा रहे हैं. इसमें इनकी गलती नहीं है, बल्कि कंपनी ने कम सफाई कर्मियों को ही कचरा उठाव के लिए लगाया है, जिसके कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है. हालात यह है कि एक सफाई कर्मी एक घर पर तीसरे और चौथे दिन पहुंच पा रहें हैं. यदि सफाई कर्मियों के जिम्में घर का कूड़ा छोड़ दिया जाये, तो घर में ही कूड़े का ढेर लग जायेगा.
कचरा उठाव की जिम्मेदारी नगर पर्षद ने श्री खेतेश्वर प्रोटेक्शन सिक्युरिटी प्राइवेट लिमिटेड पटना को दिया है, परंतु कार्य शुरू होने के बीस दिनों बाद भी शहर में डोर-टू-डोर कचरे का उठाव का कार्य बेहतर तरीके से संचालित नहीं हो रहा है.
चार लाख रुपये हर माह हो रहा खर्च : शहर की सफाई के नाम पर हर माह चार लाख 49 हजार खर्च करने के बावजूद घरों से कचरा उठाव सफल नहीं हो पा रहा है. लोगों को अंतत: घर से बाहर निकल कर ही कूड़ों को फेंकना पड़ रहा है. यानी जिस काम के लिए कंपनी को निविदा दिया गया है, वह पूरी तरह विफल है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर नगर पर्षद कचरा उठाव के लिए किसी कंपनी को क्यों रखती है.
छह माह के लिए मिला है निविदा
नगर पर्षद ने डोर-टू-डोर कचरा उठाव के लिए कंपनी को छह माह की जिम्मेदारी दी है, जिसके लिए इन छह माह में 26 लाख 94 हजार रुपये खर्च होंगे. यह काम ट्रायल के रूप में है. परंतु, फिलहाल ट्रायल में ही यह असफल दिख रही है. कंपनी राजस्थान की जोधपुर की है, जिसने पटना के श्री खेतेश्वर प्रोटेक्शन सिक्युरिटी प्राइवेट लिमिटेड को काम करने का जिम्मा दिया है. कंपनी का काम अभी बिहार के छपरा और अरवल में भी चल रहा है. ऐसे में यह उम्मीद लगायी जा रही थी कि बक्सर नगर पर्षद का काम बेहतर तरीके से कर लेगी, लेकिन, ऐसा नहीं दिख रहा है. इसके पूर्व में जिस कंपनी ने डोर-टू-डोर कचरा उठाव की जिम्मेदारी ली थी, वह भी असफल रही थी.
शर्त के अनुसार काम कर रही कंपनी : कंपनी के प्रबंधक के अनुसार नगर पर्षद के शर्त के अनुसार उसने एक वार्ड में एक सफाई कर्मी को लगा रखा है. अब सवाल यह उठता है कि एक सफाई कर्मी एक वार्ड में एक हजार घरों तक कैसे पहुंच पायेगा. इसका अंदाजा होते हुए भी नगर पर्षद ने ऐसी शर्त पर कैसे काम करा रही है.
जबकि ऐसी स्थिति में कचरा उठाव का काम नहीं हो पायेगा. नगर पर्षद को निविदा देते समय कंपनी का तर्क है कि वह नगर पर्षद के शर्त के अनुसार ही काम कर रही है. हालांकि नगर पर्षद ने इस शर्त को नकार दिया है. नगर पर्षद के अनुसार वार्ड के घरों से हर हाल में कचरे का उठाव करना है. कचरे का उठाव कैसे होगा. यह कंपनी जानेगी. सफाई व्यवस्था की जांच नगर पर्षद करेगी, जिसके अनुसार ही कंपनी को भुगतान किया जायेगा.
एक वार्ड में एक सफाई कर्मी
डोर-टू-डोर कचरा उठाव के लिए एक वार्ड में एक सफाई कर्मी को रखा गया है. कुल 34 वार्डों में 34 सफाई कर्मी हैं. दो ट्रैक्टर पर पांच-पांच लोग हैं. सफाई कर्मियों की मॉनिटरिंग के लिए तीन सुपवाइजर और एक मैनेजर है. दूसरी तरफ बक्सर नगर में कई ऐसे वार्ड हैं, जिसमें करीब एक हजार घर हैं. जबकि कई वार्डों में करीब छह सौ घर हैं. ऐसे में एक वार्ड में एक सफाई कर्मी से डोर-टू-डोर कचरा उठाव का काम कैसे पूरा होगा. इस बात को आसानी से समझा जा सकता है. यानी सफाई के नाम पर केवल कोरम पूरा किया जा रहा है.
सफाईकर्मी के भरोसे रहे, तो घर बन जायेगा कूड़े का ढेर
घरों से कचरा उठाव के लिए सफाई कर्मी नियमित नहीं आते हैं. कभी तीन दिन, तो कभी चार दिनों के बाद ही घर पर पहुंचते हैं. यदि इनके भरोसे रहा जायें, तो घर ही कूड़े का ढेर हो जायेगा.
रवि चौधरी
नगर पर्षद काफी पैसा खर्च कर सफाई की व्यवस्था की है, परंतु कंपनी के सफाई कर्मी घरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है.
गोविंद चौधरी
आखिर नगर पर्षद क्यों सफाई का जिम्मा कंपनी को दिया है. एक तो घर पर सफाई कर्मी नियमित आते भी नहीं है. दूसरे में पैसे की बरबादी हो रही है. यह व्यवस्था पूरी तरह विफल है़
धीरेंद्र चौधरी
डोर-टू-डोर कचरा उठाव का काम सही नहीं हो रहा है. नगर पर्षद को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए. आखिर लोगों को घरों से बाहर ही कूड़ा फेंकना पड़ता है. व्यवस्था ठीक नहीं है़
मो.नसीम
नप दूसरे कामों में लगा देता है कर्मियों को : कंपनी के जिला प्रबंधक मिथिलेश सिंह ने कहा कि नगर पर्षद के शर्त के अनुसार घरों से कचरा उठाव के लिए 34 सफाई कर्मियों को रखा गया है. वह भी नगर पर्षद इन्हें अन्य कामों में भी लगा देता है, जिसके कारण परेशानी हो रही है.
शिकायत मिली, तो कार्रवाई करेंगे
उपमुख्य पार्षद इफ्तेखार अहमद ने कहा कि कंपनी को कचरा उठाव की जिम्मेदारी दी गयी है. वार्ड में घरों से कचरे का उठाव होना चाहिए. यदि इसमें शिकायत मिलती है, तो इसके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
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