दो शक्षिकों के भरोसे 600 छात्र

Published at :29 Dec 2015 6:32 PM (IST)
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दो शक्षिकों के भरोसे 600 छात्र

दो शिक्षकों के भरोसे 600 छात्रअसुविधा. जीएम हाइस्कूल में साइंस, मैथ व इंगलिश की नहीं होती पढ़ाईप्रधानाध्यापक सहित तीन शिक्षकों पर स्कूल में पठन-पाठन की महती जिम्मेवारीविद्यालय में बक्सर व कैमूर के कई गांवों के छात्र यहां रोज आते हैं पढ़नेफोटो-19-रखरखाव के अभाव में बिखरी किताबें,आलमीरा में बंद पड़ी किताबें,अलमीरा में बंद प्रायोगिक सामान.राजपुर. प्रखंड […]

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दो शिक्षकों के भरोसे 600 छात्रअसुविधा. जीएम हाइस्कूल में साइंस, मैथ व इंगलिश की नहीं होती पढ़ाईप्रधानाध्यापक सहित तीन शिक्षकों पर स्कूल में पठन-पाठन की महती जिम्मेवारीविद्यालय में बक्सर व कैमूर के कई गांवों के छात्र यहां रोज आते हैं पढ़नेफोटो-19-रखरखाव के अभाव में बिखरी किताबें,आलमीरा में बंद पड़ी किताबें,अलमीरा में बंद प्रायोगिक सामान.राजपुर. प्रखंड क्षेत्र के नागपुर स्थित जीएम उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले 600 बच्चों का भविष्य मात्र तीन शिक्षकों के भरोसे संवारा जा रहा है़ इन तीन शिक्षकों में एक प्रधानाध्यापक का कार्य भार देखते हैं, जबकि दो अन्य शिक्षक विद्यालय के बच्चों को पढ़ाते हैं. इस विद्यालय में बक्सर जिला के अलावे निकटवर्ती कैमूर जिला के दर्जनों गांवों के बच्चे भी पढ़ने के लिए आते हैं. तिवाय, धर्मपुरा, मोरथ, महिला, नागपुर, गैधरा, हंकारपुर, कजरिया, पीपरा के अलावा कई अन्य गांवों के बच्चे यहां रोज पढ़ने आते हैं, लेेकिन पढ़ाई नहीं होने के कारण छात्र अपनी हाजिरी बना कर वापस घर चले जाते हैं. इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र नरेंद्र कुमार, मदन कुमार,विकास कुमार छात्रा ज्योति कुमारी, साधना कुमारी, प्रीति कुमारी आदि ने बताया कि विद्यालय में फिलहाल सिर्फ हिंदी और संस्कृत की पढ़ाई होती है. बाकी विषयों की पढ़ाई के लिए इन छात्रों को कोचिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है़ विज्ञान विषय के शिक्षक प्रभारी प्रधानाध्यापक अमरनाथ सिंह हैं, जो फुरसत के क्षणों में बच्चों को पढ़ा देते हैं. लेकिन, विद्यालय के कार्यों से इन्हें अक्सर बाहर ही रहना पड़ता है़नहीं मिलती सुविधाएं : इस विद्यालय में एक बेहतर पुस्तकालय, बच्चों के प्रयोग के लिए सुसज्जित प्रयोगशाला, खेलकूद का सामान आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं. लेकिन छात्रों का दुर्भाग्य ऐसा कि विशाल खेल का मैदान और सारी सुविधाएं होते हुए भी यहां के बच्चों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है़ लाइब्रेरियन की कमी से यहां किताबें धूल से भरी हुई है़ं प्रयोगशाला का सामान अालमीरा में बंद व बेकार पड़ा हुआ है़क्या कहते हैं प्रधानाध्यापकविद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अमरनाथ सिंह ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी है़ विज्ञान का प्रायोगिक शिक्षक, खेल शिक्षक और लाइब्रेरियन नहीं हाने से बच्चों को इसकी सुविधा नहीं दे पाते हैं. इसकी लिखित सूचना विभाग को दे दी गयी है, लेकिन अभी तक शिक्षक उपलब्ध नहीं कराया गया है.

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