आवंटन के अभाव में बक्सर-कोईलवर तटबंध का काम ठप

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आवंटन के अभाव में बक्सर-कोईलवर तटबंध का काम ठप

गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों को बाढ़ से बचाने के लिए 1970 के दशक में बनाये गये बक्सर-कोईलवर तटबंध के सुदृढ़ीकरण का कार्य इन दिनों ठप पड़ा हुआ है.

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बक्सर. गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों को बाढ़ से बचाने के लिए 1970 के दशक में बनाये गये बक्सर-कोईलवर तटबंध के सुदृढ़ीकरण का कार्य इन दिनों ठप पड़ा हुआ है. करोड़ों की लागत से शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना अब फंड की कमी और मजदूरों के अभाव में अधर में लटक गयी है. निर्धारित समय सीमा के मुकाबले अब तक महज 24 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है. बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा तटबंध की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसके शुद्धिकरण और कालीकरण का कार्य 15 मई 2025 से शुरू किया गया था. इस परियोजना पर करीब 182 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. विभाग ने निर्माण एजेंसी को 18 माह के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया था. इसके तहत नवंबर 2026 तक परियोजना पूरी हो जानी थी. लेकिन मौजूदा हालात इस लक्ष्य को पूरा होते नहीं दिखा रहे हैं. परियोजना का जिम्मा पटना की राजीव कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है. शुरुआत में काम तेजी से चला. मशीनें लगीं, बड़ी संख्या में मजदूरों को लगाया गया. लेकिन कुछ ही महीनों बाद भुगतान में देरी के कारण काम की रफ्तार धीमी पड़ती गयी और अब स्थिति यह है कि निर्माण कार्य लगभग बंद हो चुका है. विभागीय सूत्रों के अनुसार इस योजना के लिए राज्य सरकार से समय पर राशि का आवंटन नहीं हो पा रहा है. ट्रेजरी स्तर पर भुगतान लंबित रहने के कारण ठेकेदार एजेंसी को अब तक कुल लागत का लगभग 10 प्रतिशत ही भुगतान किया गया है. इतनी बड़ी परियोजना के लिए यह राशि बेहद कम मानी जा रही है. भुगतान में देरी का सीधा असर मजदूरों पर पड़ा है. निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को समय पर मजदूरी नहीं मिलने से असंतोष बढ़ा. होली के दौरान अधिकांश मजदूर अपने गांव चले गए और अब तक वापस नहीं लौटे. मजदूरी बकाया रहने के कारण वे दोबारा काम पर आने को तैयार नहीं हैं. ठेकेदार भी भुगतान के अभाव में नए मजदूर लगाने में असमर्थ है. स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान तटबंध ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा होती है. यदि समय पर इसका सुदृढ़ीकरण नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजनाएं तो बनती हैं लेकिन उनका क्रियान्वयन समय पर नहीं होता. विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा किनारे बसे इलाकों में तटबंधों का मजबूत होना बेहद जरूरी है. नदी के प्रवाह में लगातार बदलाव और कटाव की घटनाएं इस खतरे को और बढ़ा रही हैं. ऐसे में पुराने तटबंधों का समय-समय पर मरम्मत और सुदृढ़ीकरण अनिवार्य है. तटबंध का महत्व केवल बाढ़ से सुरक्षा तक सीमित नहीं है. यह क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को भी प्रभावित करता है. तटबंध मजबूत रहने से खेतों में अनियंत्रित पानी का प्रवेश रुकता है और फसलें सुरक्षित रहती हैं. वर्तमान में काम ठप होने से किसानों की चिंता भी बढ़ गयी है. क्या कहते हैं अधिकारी फंड मिलते ही कार्य को फिर से गति दी जायेगी. उन्होंने कहां कि परियोजना को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जायेगा. जैसे ही ट्रेजरी से कार्यरत एजेंसी का भुगतान किया जाता है, वैसे ही काम में पुनः गति लाया जायेगा. कन्हैया कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता, बाढ़ विभाग

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