अधिवक्ता की मौत पर कोर्ट में हंगामा

Published at :12 Dec 2015 2:11 AM (IST)
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अधिवक्ता की मौत पर कोर्ट में हंगामा

दुखद. बेटी के साथ हो रही छेड़खानी का विरोध करने पर 27 नंवबर को अपराधियों ने मारी थी गोली बक्सर, कोर्ट : अपराधियों की गोली से जख्मी अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा की मौत शुक्रवार 11 दिसंबर को हो गयी. अपराधियों ने अधिवक्ता को गोली इस लिए मारी थी कि वे अपनी बेटी के साथ हो […]

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दुखद. बेटी के साथ हो रही छेड़खानी का विरोध करने पर 27 नंवबर को अपराधियों ने मारी थी गोली
बक्सर, कोर्ट : अपराधियों की गोली से जख्मी अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा की मौत शुक्रवार 11 दिसंबर को हो गयी. अपराधियों ने अधिवक्ता को गोली इस लिए मारी थी कि वे अपनी बेटी के साथ हो रहे छेड़खानी का विरोध किये थे. प्राथमिकी दर्ज कराने से गुस्साये अपराधियों ने 27 नवंबर को दिनदहाड़े प्रेम प्रकाश को गोली मार दी थी.
गोली श्वांस नली के पास जाकर अटक गयी थी, जिसका बनारस में ऑपरेशन किया गया. ऑपरेशन के बाद अधिवक्ता के पैर शून्य हो गये और काम करना बंद कर दिये, मगर चिकित्सकों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया था. लेकिन, शुक्रवार को ग्लोबल हॉस्पिटल बनारस में अधिवक्ता ने दम तोड़ दिया.
अधिवक्ता की मौत से पूरा वकील समुदाय दुखी हो गया और हत्यारोपितों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सड़क को जाम कर न्यायालय में नो वर्क के साथ-साथ समाहरणालय के दोनों सड़कों को बेंच लगा कर जाम कर दिया, जिससे राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए लाये जा रहे टेंट और अन्य सामान के वाहन न्यायालय परिसर से बाहर खड़े रहे़ इतना ही नहीं, न्यायिक अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों के वाहन भी न्यायालय में नहीं गये, जिससे उन्हें पैदल ही जाना पड़ा. धीरे-धीरे अधिवक्ताओं की संख्या भी बढ़ती रही और उनका आक्रोश भी बढ़ता रहा. वहीं, विरोध के कारण अपराह्न दो बजे तक जिलाधिकारी समेत सभी अधिकारियों को अपने-अपने कक्षों में रहना पड़ा. आनन-फानन में जिला जज, सीजेएम, जिलाधिकारी और एसपी को रणनीतियां बनानी पड़ीं, जिसके बाद अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को मनाने की कोशिश की.
अधिवक्ता डीएम को बुलाने पर अड़े थे :अधिवक्ता जिलाधिकारी के आने की मांग कर रहे थे. इसके पूर्व डीएसपी शैशव यादव एवं एसडीओ गौतम कुमार व अन्य अधिकारियों ने बातचीत का प्रयास किया, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांगों पर डटे रहे तथा नारेबाजी कर इन्हें वापस कर दिये.
बाद में अपराह्न दो बजे के बाद जिलाधिकारी रमण कुमार न्यायालय परिसर के मुख्य द्वार पर धरना पर बैठे अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श शुरू किया. अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से जिलाधिकारी को अपना मांग पत्र सौंपा.उन्होंने मृत अधिवक्ता के आश्रित को 50 लाख रुपये की मदद एवं अंतरिम राहत के रूप में एक लाख रुपये के साथ-साथ कुल आठ सूत्री मांगों से संबंधित पत्र सौंपा. जिलाधिकारी ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि अविलंब 20 हजार रुपये उनके घर पर सहायतार्थ पहुंचा दिया जायेगा तथा अन्य मांगों के लिए वे गृह विभाग को लिखेंगे. चूंकि गोली कांड में मरे व्यक्ति के लिए कोई फंड सुनिश्चित नहीं है.
डीएम ने लोक अदालत के लिए अधिवक्ताओं से मांगा सहयोग
जिलाधिकारी रमण कुमार ने अधिवक्ताओं से अनुरोध करते हुए कहा कि जो क्षति हो गयी है, उसकी भरपाई तो संभव नहीं है, लेकिन आगे क्षति होने से बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि शनिवार को आयोजित होनेवाले राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिवक्ता सहयोग करें. इसके लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बार के अध्यक्ष विजय नारायण मिश्र से बातचीत की, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे तथा उन्होंने नेशनल लोक अदालत के बहिष्कार करने के निर्णय पर अड़े रहे.
जम कर हुई नारेबाजी, शाम तक
होता रहा विरोध : धरना के बाद अधिवक्ताओं का समूह नारेबाजी करते हुए परिसर में पहुंचा और भीड़ एक सभा में तब्दील हो गयी. अधिवक्ता एक ऊंची जगह से खड़े होकर अपना-अपना संबोधन किया तथा घटना की तीव्र भर्त्सना करते हुए लोक अदालत को बहिष्कार करने की बात कही. इस बीच वहां पर पहुंचे अनुमंडल पदाधिकारी एवं डीएसपी को कोपभाजन होना पड़ा.
अधिवक्ताओं की मांगें : अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिन्हा की हत्या के बाद अधिवक्ताओं द्वारा आठ सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपी गयी. मांग पत्र में अधिवक्ता के आश्रित को 50 लाख रुपये एवं अंतरिम राहत के रूप में एक लाख रुपये, आश्रित को सरकारी नौकरी, दिवंगत अधिवक्ता की
आदमकद प्रतिमा की स्थापना, घटना के अनुसंधान कर्ताओं का निलंबन, अभियुक्तों की अविलंब गिरफ्तारी एवं स्पीडी ट्रायल, दिवंगत अधिवक्ता के परिवार के सदस्यों की सुरक्षा, व्यवहार न्यायालय के सभी अधिवक्ताओं के जानमाल की सुरक्षा. उक्त मांगों को नहीं पूरा करने पर आठवीं कड़ी के रूप में राष्ट्रीय लोक अदालत का पूर्णत: बहिष्कार शामिल है.
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