1987 के बाद पहली बार भूकंप का लगा इतना बड़ा झटका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Apr 2015 8:28 AM (IST)
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बुजुर्गो की ताजा हुई याद. भूकंप के दो झटकों से दहशतजदा हुए लोग, दो जख्मी भूकंप के कारण बक्सर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार के दिन में कोहराम मच गया और घरों से निकल कर लोग सड़क और खुले मैदान में चले आये. जिले में किसी की मौत अथवा मकान गिरने की […]
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बुजुर्गो की ताजा हुई याद. भूकंप के दो झटकों से दहशतजदा हुए लोग, दो जख्मी
भूकंप के कारण बक्सर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार के दिन में कोहराम मच गया और घरों से निकल कर लोग सड़क और खुले मैदान में चले आये. जिले में किसी की मौत अथवा मकान गिरने की सूचना नहीं है, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली है. कई मकानों में झटके से सिर्फ दरारें आयीं हैं.
बक्सर/डुमरांव : भूकंप के कारण आज दिन में बक्सर जिले के शहरी क्षेत्र में कोहराम मच गया. सुबह 11 : 45 बजे जब लोग अपने घर में दिनचर्या के कामों में लगे थे. तभी भूकंप के झटके महसूस किये गये और लोग घरों से बाहर निकल आये. शहर की घनी आबादी कोइरपुरवा, ठठेरी बाजार, पीपरपांती रोड समेत पुराने मकानवाले क्षेत्रों में कोहराम मच गया. भूकंप की तीव्रता इतनी थी कि हर लोगों को एहसास हो गया कि भूकंप का झटका आ गया है.
कोइरपुरवा मुहल्ले में आधार कार्ड बनाने के लिए भीड़ जुटी थी, तभी भूकंप का झटका आ गया और लोग वहां से दौड़ कर ज्योति चौक पर भाग कर जमा हो गये. भूकंप के झटके का प्रशासनिक आंकलन में तीव्रता 5.5 से 6.5 के बीच में आंकी गयी है.
शनिवार को आये भूकंप के दो झटकों से शहरवासियों के चेहरे पर दहशत की लकीरें खींच गयीं. खौफ से लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आये. भूकंप की गति इतनी देर तक थी की लोग सड़कों पर निकल आये और अफरातफरी की स्थिति मच गयी. सुबह 11 बज कर 42 मिनट पर आये भूकंप से कई घरों में दरार आ गयी, तो वहीं, घरों में लगे पंखे, दरवाजे आदि हिलने-डोलने लगे.
वहीं, जेनरल स्टोर की दुकानें में रेक पर सजाये गये सामान गिर कर जमीन पर आ गये.
भूकंप के कारण दीवार गिरने से रास्ते से गुजर रहे गोपाल डेरा गांव निवासी रामाकांत चौधरी व अरक गांव निवासी गोपाल चौधरी जख्मी हो गये, जिन्हें निजी अस्पताल में इलाज के लिए भरती कराया गया. इसके अलावे शहर के दर्जनों मकानों में दरारें पड़ गयीं.
1987 में आये थे झटके : वर्ष 1987 के 28 जनवरी की सुबह करीब 04 : 32 में शहर के लोगों ने इसी तरह के भूकंप के झटके देखे थे. उस समय के बुजुर्ग प्रभु नारायण पांडेय, रामजी केशरी, दिनेश्वर सिंह आदि बताते हैं कि 30 वर्षो के बाद इतने तेज व अधिक देर तक झटके महसूस किये गये.
उस दौरान भी कई मकानों में दरारें आ गयी थीं.
कुछ देर लिये बंद हो गया जनसंपर्क : भूकंप के बाद करीब 15 मिनट तक मोबाइल व लैंडलाइन फोन सेवा बंद हो गया. कुछ देर के बाद टावर आने पर लोगों ने अपने रिश्ते-नातेदारों से भूकंप की चर्चा की व हालचाल जाना.
चार घंटे तक गुल रही बिजली : भूकंप के दौरान गुल बिजली चार घंटे तक नहीं आयी. इस दौरान लोगों के बीच बिजली नहीं आने की अफवाह उड़ती रही.करीब 4:05 बजे बिजली आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली.
दरक गये मकान, दहल गया दिल
महावीर स्थान तुरहा टोली के बैजनाथ उपाध्याय ने कहा कि उनका मकान पुराना था और काफी क्षतिग्रस्त हो गया है. उन्होंने घर से बाहर निकल कर अपने और अपने परिवार की जान बचायी.
मुआवजे के लिए जिलाधिकारी और थाने में अपने लिखित रूप से आवेदन दिया है. वहीं, सिकरौल थाना क्षेत्र के बरमेश्वरपुर गांव में विजय नारायण शर्मा का मिट्टी से जोड़ी गयी ईंट की दीवार गिर गयी साथ ही उससे लगा गेट भी गिर गया. घर में भूकंप के कारण कोई नहीं था, जिसके कारण नुकसान नहीं हुआ.
मेन रोड स्थित कौशिक कुमार के घर की दीवारों में भूकंप से दरारें पड़ गयीं हैं, जिसके कारण मकान कमजोर हो गया है.वहीं, खलासी मुहल्ला स्थित साहित्यकार कुमार नयन के घर में जमीन व दीवार में दरार पड़ गयी है.
भूकंप के झटके ने सबको किया हैरान
राजपुर : शनिवार की दोपहर 11:45 बजे अचानक भूकंप के झटके महसूस किये गये. इस झटके साथ ही सभी लोग आश्चर्य में पड़ गये और अपने-अपने घरों से बाहर निकल कर भागने लगे. घटना के समय कोई खाना खा रहा था, तो कोई आराम कर रहा था. झटका लगभग 20 से 30 सेकेंड तक महसूस किया गया.
इस भूकंप के झटके के कारण प्रखंड मुख्यालय राजपुर में बैंकों में पहुंचे ग्रामीणों के बीच अफरातफरी मच गयी औरलोग बैंक से बाहर निकल कर रोड पर आ गये. लोग अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां फोन कर कुशल समाचार जानी.
कई जगहों पर कच्चे मकान हुए क्षतिग्रस्त
ब्रह्मपुर. प्रखंड के विभिन्न इलाकों से मिल सूचना के अनुसार कई गांवों में मिट्टी के कच्चे मकान गिर गये हैं और कई में दरारें आ गयी हैं. भूकंप का झटका इतना तेज था कि घरों से लोग निकल कर खेत-खलिहानों में पहुंच गये. बड़े लोग जहां डर के मारे भयभीत थे, वहीं, बच्चों के लिए यह आश्चर्य का विषय था.
ब्रह्मपुर बैंक में कार्यरत सभी कर्मचारी एवं ग्राहक डर के मारे रोड पर भाग खड़े हुए. इधर निमेज गांव के बड़क दूबे के मिट्टी का मकान गिर गया. पीड़ित बड़क दुबे ने बताया कि जब भूकंप आया, तो मकान हिलने लगा और मिटटी के कई टुकड़े मेरे ऊपर पर गिर गये.
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