122 में 56 कंपनियां बंद

Published at :23 Sep 2014 1:30 AM (IST)
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122 में 56 कंपनियां बंद

बक्सर : जिले में औद्योगिक क्षेत्र है, जहां उद्योग स्थापित होने पर हजारों बेरोजगार युवकों को रोजगार मिल सकता है, लेकिन कई कारणों से यहां संचालित हो रही अधिकांश कंपनियां आज बंद पड़ी हैं, जिसके कारण जिले के बेरोजगार युवक राज्य से पलायन होने को विवश हैं. बावजूद इसके उद्योग स्थापना को लेकर सरकार कोई […]

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बक्सर : जिले में औद्योगिक क्षेत्र है, जहां उद्योग स्थापित होने पर हजारों बेरोजगार युवकों को रोजगार मिल सकता है, लेकिन कई कारणों से यहां संचालित हो रही अधिकांश कंपनियां आज बंद पड़ी हैं, जिसके कारण जिले के बेरोजगार युवक राज्य से पलायन होने को विवश हैं. बावजूद इसके उद्योग स्थापना को लेकर सरकार कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा रही है.

* 66 कंपनियों में चल रहा काम

बेरोजगार युवकों को रोजगार मिले इस उद्देश्य से जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना वर्ष 1974 में की गयी. उस वक्त 122 कंपनियों को उद्योग लगाने के लिए भूमि आवंटित की गयी थी. फिलहाल 66 कंपनियां चल रही हैं, लेकिन कई तरह की परेशानियों के कारण 56 कंपनियां बंद हैं. इन कंपनियों में हर तरह के रोजगार सृजन कंपनी मौजूद हैं. विभागीय सूत्रों के अनुसार इनमें 28 कंपनियां वित्तीय स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण बंद हैं, जबकि 10 कंपनियां विभाग के नियमों के शर्त में खरा नहीं उतरी, जिसके कारण विभाग ने इन कंपनियों के लाइसेंस को रद्द कर दिया. शेष वर्क शुरू नहीं होने के कारण बंद हो गयीं. बंद कंपनियां कब चालू होंगी. इसका जवाब विभाग के पास फिलहाल नहीं है.
* क्यों बंद हुईं कंपनियां
विभागीय सूत्रों के अनुसार उद्योग लगाने के लिए पूर्व में वित्त निगम से लोन ली गयी थी, लेकिन लोन को समय पर नहीं चुकाने के कारण वित्त निगम ने इन कंपनियों को बंद करा दिया. कुछ कंपनियां घाटे में जाने के कारण बंद कर दी गयीं. सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक बंद कंपनियों को चालू कराने की कोई पहल शुरू नहीं हुई है, जिसके कारण बेरोजगारों का पलायन शुरू है.
* भूमि का क्या है रेट
उद्योग लगाने के लिए फिलहाल प्रति एकड़ 3 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये तय किया गया है. विभाग ने बताया कि यह राशि जुलाई 2014 से लागू है. इसके पूर्व में भूमि आवंटन के लिए 11 से 12 लाख रुपये प्रति एकड़ था. भूमि का मूल्य बढ़ने के कारण उद्यमी उद्योग में विफल साबित हो रहे हैं.
* बिआडा की जमीन पर नहीं मिलता लोन
वित्त निगम विभाग अब बिआडा की जमीन पर उद्योग लगाने के लिए उद्यमियों को लोन देना बंद कर दिया है. वहीं, दूसरी तरफ बिआडा की जमीन पर बैंक भी लोन नहीं दे रहा है. उद्यमियों के अनुसार बिआडा की जमीन पर लोन देने से लोन की राशि सुरक्षित नहीं रहती. बैंक प्राइवेट जमीन पर लोन देने की बात कहता है, जिसके कारण उद्यमियों को उद्योग लगाने में परेशानी होती है. इधर, सूत्रों के अनुसार यदि कोई नये उद्यमी अपने बल पर उद्योग लगाने की कोशिश करता है, तो राज्य बिआडा विभाग उद्यमियों को कागजी रूप से परेशान करता है, जिसके कारण उद्यमी परेशान होकर उद्योग लगाने से कतराते हैं.
* क्या कहते हैं उद्यमी
इस संबंध में कई उद्यमियों से बातचीत की गयी, इसके दौरान उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापना के लिए बिआडा की जमीन लेने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है.पटना हेड ऑफिस से कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है, जिसके कारण उद्योग लगाने में परेशानी होती है.
* क्या कहते हैं पदाधिकारी
जिला बियाडा इंचार्ज उमाशंकर कहते हैं कि उद्यमियों को फाइनेंसियल रूप से सहयोग करना होगा तभी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग का विकास हो सकता है.
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