फाइल- 25- 10 प्रतिशत सर्किल रेट में वृद्धि का निर्णय किसान आंदोलन की जीत : संयुक्त किसान मोर्चा

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10 प्रतिशत सर्किल रेट में वृद्धि का निर्णय किसान आंदोलन की जीत : संयुक्त किसान मोर्चा

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चौसा. हरेक साल 10 प्रतिशत सर्किल रेट में वृद्धि का फैसला तब हुआ जब कैमूर से लेकर बक्सर तक, खगड़िया से लेकर रोहतास तथा पटना तक किसान अनवरत धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं. ज़ुल्म की पराकाष्ठा देखिए जहां-जहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. वहां गत 15 सालों से सर्किल रेट बढ़ाए नहीं गये और कहीं-कहीं तो कम कर दिये गये. हर साल जमीन के दाम में 10 प्रतिशत वृद्धि मानकर किसानों को बकाए मुआवजे का भुगतान होगा. संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार ने इसे किसान आंदोलन की बड़ी जीत कहा. किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि बिहार में वर्ष 2009-10 से ही भूमि का अधिग्रहण विभिन्न परियोजनाओं के लिए हो रही है. जहां जमीन का अधिग्रहण होना है वहां जानबूझकर जमीन का वैल्यूएशन को बरसों से नहीं बढ़ाया गया. औने-पौने दाम पर किसानों की जमीन छीनकर कार्पोरेट को देने की साजिश को किसान भली भांति समझ गये. इसीलिए बक्सर के चौसा से लेकर कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, भागलपुर, मुंगेर सहित अन्य जिलों में किसान वर्षों से संघर्षरत थे. किसानों के जुझारू आंदोलन के चलते सरकार की सभी योजनाएं वर्षों से लंबित है. भूमि अधिग्रहण का कार्य आगे नहीं बढ़ पा रही थी. किसानों का मनोबल को तोड़ने के लिए उनके ऊपर तरह-तरह से सरकार दमन, अत्याचार, जोर-जुलम और अमानवीय घोर अन्याय कर रही थी. परन्तु किसान अपनी एकता के बल पर लगातार सरकार के दमनात्मक कार्रवाइयों से मुकाबला कर रहे थे. किसान नेता दिनेश कुमार,अशोक प्रसाद सिंह, अमेरिका महतो, अनिल कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह, सत्येन्द्र तिवारी, पशुपति सिंह, राम प्रवेश सिंह, भोला यादव ने इसे किसान आंदोलन की बड़ी जीत कहा. किसानों का संगठित, अनवरत और जुझारू आंदोलन ने सरकार को आखिर में झुकने के लिए मजबूर किया. बगैर किसानों की सहमति के भूमि अधिग्रहण नहीं हो सकेगा. किसान अपना जान दे देंगे, पर अपना जमीन नहीं देंगे. किसानों की जमीन छीन कर कॉर्पोरेट को सस्ते दामों पर देने हेतु औने- पौने भाव में किसानों से जमीन खरीदने की सरकार की गंदी साजिश को किसान भली-भांति समझ रहे थे. संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार ने सरकार से मांग की है कि सरकार अविलंब चौसा, कैमूर, बिहटा सहित सभी इलाकों में नए सिरे से जमीन का कीमत निर्धारित कर बाजार दर से चार गुणा मुआवजे की भुगतान करें. इसके लिए 26 नवंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर किसान अपनी मांगों को जोरदार ढंग से उठायेंगे.

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