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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ग्रामीण बच्चों का भविष्य संवारने का लक्ष्य : डीएम

Updated at : 17 Jun 2025 10:19 PM (IST)
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ग्रामीण बच्चों का भविष्य संवारने का लक्ष्य : डीएम

जिला स्तरीय प्रबंधन इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. जिसमें जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान मिशन, नालंदा की अध्यक्षता में मिशन निपुण बिहार की समीक्षा बैठक की गयी.

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बिहारशरीफ. जिला स्तरीय प्रबंधन इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. जिसमें जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान मिशन, नालंदा की अध्यक्षता में मिशन निपुण बिहार की समीक्षा बैठक की गयी. बैठक का उद्देश्य जिले में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और लक्ष्यपूर्ति हेतु रणनीति तैयार करना था. बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मिशन निपुण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों में पढ़ने, लिखने और अंक गणितीय दक्षता विकसित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है. लक्ष्य है कि वर्ष 2026–27 तक कक्षा 3 के अंत तक सभी बच्चे बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में दक्ष हो सकें. मिशन निपुण के प्रमुख पहलु, अक्षर पहचानना, वाक्य समझना. पढ़ने-लिखने की प्रारंभिक दक्षता, गणनात्मक कार्य: जोड़, घटाव, गुणा, भाग, मापन, समय की समझ, चहक कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को खेल के जरिए शिक्षा से जोड़ना, विद्यालय से बच्चों, शिक्षकों और समुदाय का जुड़ाव बढ़ाना है. सत्र 2024-25 के लिए जिले के सभी प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ने वाले 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को एफएलएन स्टूडेंट किट प्रदान की गई है. साथ ही सभी विद्यालयों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को एफएनएन लक्ष्यों और मिशन निपुण की उपयोगिता को प्रचारित करने का निर्देश दिया गया है. जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में है. उन्होंने जोर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों के हाशिये पर रहने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना उनका एकमात्र उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों और शिक्षकों के प्रति गलत धारणा बदलनी होगी. हमारे ग्रामीण विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षक कार्यरत हैं, जो बच्चों को आईआईटी, नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा में ले जा सकते हैं. जिलाधिकारी ने डीपीओ, आइसीडीएस को 10 दिनों के भीतर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के 6 वर्ष के बच्चों का सर्वे कर उन्हें नजदीकी प्राथमिक विद्यालय से मैपिंग करने का निर्देश दिया. सेविका/सहायिका के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों का नामांकन, टेक्स्टबुक की उपलब्धता सुनिश्चित करना, एक भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न हो–यह मुख्य उद्देश्य रखा गया. वाद-विवाद, स्पोकन इंग्लिश, और स्कूल स्थापना दिवस जैसे नवाचारों को प्राथमिक विद्यालयों में लागू करने का सुझाव दिया. विद्यालयों में टीएलएम किट का वितरण और प्रभावी उपयोग, शिक्षकों का प्रशिक्षण और उसकी गुणवत्ता पर विशेष बल देने की जरूरत है. बैठक में जिला स्तरीय बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान मिशन की प्रबंधन इकाई के सभी नामित सदस्य और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (प्रखंड स्तरीय सचिव) उपस्थित रहे. सभी को मिशन निपुण बिहार के तहत चल रहे कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये. बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (आपदा), जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्राचार्य डायट (नूरसराय), जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, असैनिक शल्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, डीपीओ समग्र शिक्षा, जीविका परियोजना प्रबंधक, सेव द चिल्ड्रेन के समन्वयक, प्राथमिक शिक्षक प्रतिनिधि, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी एवं प्रबंधन इकाई के सदस्य शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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