राजगीर मलमास मेला में पुरुषोत्तम एकादशी पर महर्षि चिदात्मन बोले "यह व्रत मिटाता है पाप, देता है मोक्ष का मार्ग"

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 11 Jun 2026 8:19 PM

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प्रवचन देते महर्षि चिदात्मन

Rajgir Malmas Mela 2026: राजगीर के ऐतिहासिक गढ़ महादेव मंदिर में पुरुषोत्तम एकादशी पर सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ के पीठाधीश्वर महर्षि चिदात्मन जी महाराज का दिव्य प्रवचन हुआ. उन्होंने तीन साल में एक बार आने वाली इस एकादशी के पुण्य और व्रत के नियमों पर प्रकाश डाला. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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Rajgir Malmas Mela 2026 (रामविलास): नालंदा जिले में स्थित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व विख्यात आध्यात्मिक नगरी राजगीर में इन दिनों चल रहे ऐतिहासिक ‘राजकीय पुरुषोत्तम मलमास मेला’ के बीच भक्ति और अध्यात्म का एक अनूठा व विहंगम रूप देखने को मिल रहा है. ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परम पावन ‘पुरुषोत्तम एकादशी’ के पावन और दुर्लभ अवसर पर राजगीर के सुप्रसिद्ध गढ़ महादेव मंदिर परिसर में एक विशाल आध्यात्मिक शिविर का आयोजन किया गया. इस शिविर के मुख्य ज्ञान मंच से सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ के पीठाधीश्वर परम पूज्य महर्षि चिदात्मन जी महाराज ने गुरुवार को उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को एकादशी व्रत के महान महत्व, पौराणिक महात्म्य और उसके गहरे आध्यात्मिक व वैज्ञानिक लाभों के बारे में विस्तार से समझाया.

तीन साल में केवल एक बार आता है यह महा-संयोग, सामान्य एकादशियों से कई गुना अधिक है पुण्य

महर्षि चिदात्मन जी महाराज ने कथा पंडाल में उपस्थित नर-नारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ऊंचा स्थान है. लेकिन पुरुषोत्तम मास (अधिमास) के भीतर पड़ने वाली यह पुरुषोत्तम एकादशी अत्यंत दुर्लभ और महा-पुण्यदायी मानी गई है. इस विशेष एकादशी का आगमन प्रत्येक तीन वर्ष के कठिन चक्र में केवल एक बार ही होता है. यही मुख्य कारण है कि इसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व साल की अन्य सामान्य एकादशियों की तुलना में कहीं अधिक और अनंत माना गया है.

केवल अन्न का त्याग करना ही सच्चा व्रत नहीं, मन-वचन और कर्म से पवित्र होना सबसे जरूरी

महर्षि चिदात्मन जी महाराज ने शास्त्रों और पुराणों का हवाला देते हुए कहा कि पुरुषोत्तम एकादशी साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा व आशीर्वाद प्रदान करने वाली परम पावन तिथि है. इस दिन जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा, अटूट भक्ति और विधि-विधान से व्रत रखता है, जप-तप करता है और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देकर श्रीहरि का स्मरण करता है, उसके अनेक जन्मों के संचित पाप और विकार तत्काल नष्ट हो जाते हैं. उन्होंने श्रद्धालुओं को सीख देते हुए कहा कि एकादशी का वास्तविक और व्यावहारिक अर्थ केवल पेट को भूखा रखना या अन्न का त्याग करना नहीं है, बल्कि अपनी पांचों ज्ञानेंद्रियों को वश में कर मन, वचन और कर्म को भी पूरी तरह पवित्र बनाना है. जब मनुष्य अपने भीतर से क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को कचरे की तरह बाहर निकाल फेंकता है, तभी उसे ईश्वर की सच्ची शरण मिलती है.

गीता और विष्णु सहस्रनाम के पाठ से गूंजा पंडाल, भक्ति रस में सराबोर हुए हजारों श्रद्धालु

पीठाधीश्वर जी ने प्रवचन के दौरान विशेष रूप से बताया कि पुरुषोत्तम मास की इस महान तिथि पर किए गए किसी भी छोटे से दान, पूजा-पाठ, श्रीमद्भगवद्गीता के श्रवण और प्रभु विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranama) के सामूहिक पाठ का फल आम दिनों की तुलना में करोड़ों गुना अधिक बढ़ जाता है. यह पावन व्रत न केवल मनुष्य को इस मृत्युलोक में सभी सांसारिक सुख-संपत्ति और मानसिक संतुलन प्रदान करता है, बल्कि मृत्यु के बाद उसके लिए सीधे मोक्ष और परमधाम के मार्ग को भी पूरी तरह सुगम व प्रशस्त कर देता है.

इस दिव्य आध्यात्मिक और ज्ञानमयी प्रवचन को सुनने के लिए नवादा, नालंदा, पटना और देश के विभिन्न राज्यों से आए भारी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु कथा पंडाल में देर शाम तक डटे रहे. प्रवचन के समापन के बाद पूरे गढ़ महादेव मंदिर परिसर का वातावरण भगवान के नाम के मधुर संकीर्तन और जयकारों से पूरी तरह ओतप्रोत व गुंजायमान हो उठा, जिससे पूरा राजगीर मेला क्षेत्र भक्ति के सागर में डूबा हुआ नजर आया.

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