केवीके में मशरूम उत्पादन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण, 30 किसानों को दी जा रही जानकारी

किसानों को जानकारी देते हुए.
Nalanda News : मशरूम की खेती की शुरुआत स्पॉन (बीज) से होती है, जिसे भूसे या पुआल में मिलाकर बैग में भरा जाता है. बैग को नम और अंधेरी जगह पर रखा जाता है, जहां कुछ दिनों में मशरूम निकलने लगते हैं.
Nalanda News : (सुनील कुमार की रिपोर्ट)
हरनौत स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में जिले के 30 महिला एवं पुरुष किसानों को मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर पांच दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के चौथे दिन गुरुवार को किसानों को मशरूम की खेती से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई.
स्पॉन से शुरू होती है मशरूम की खेती
केवीके की वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. सीमा कुमारी ने बताया कि यह निःशुल्क प्रशिक्षण 2 जून से शुरू किया गया था, जो शुक्रवार को प्रमाण पत्र वितरण के साथ संपन्न होगा.
उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती की शुरुआत स्पॉन (बीज) से होती है, जिसे भूसे या पुआल में मिलाकर बैग में भरा जाता है. इसके बाद इन बैग को नम और अंधेरी जगह पर रखा जाता है, जहां कुछ दिनों में मशरूम निकलने लगते हैं.
सही देखभाल से 20 से 30 दिनों में फसल
डॉ. कुमारी ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए हल्की नमी और स्वच्छ वातावरण बेहद जरूरी है. अधिक धूप और गर्मी से फसल खराब हो सकती है, इसलिए इसे हमेशा ठंडी और छायादार जगह पर रखना चाहिए. सही देखभाल से 20 से 30 दिनों में पहली फसल तैयार हो जाती है.
किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय
उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती किसानों के लिए एक बेहतर आय का साधन बन सकती है, क्योंकि इसकी बाजार में सालभर मांग रहती है। होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू उपयोग में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है.
कम जगह और कम लागत में भी इसकी खेती शुरू की जा सकती है, जिससे किसानों को जल्दी आमदनी मिलती है. यदि वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती की जाए तो यह कृषि आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है.
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By Rajeev Kumar
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