नालंदा में सात साल से नहीं हुआ कर्मचारियों का सामूहिक तबादला, प्रमोशन का इंतजार जारी

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सात साल से नालंदा में सामूहिक तबादला व प्रोन्नति लंबित, सरकार की नई एसओपी के बाद कर्मचारियों की बढ़ी उम्मीद

नालंदा कलेक्ट्रेट का सांकेतिक तस्वीर | Prabhat Khabar Network

Nalanda Employee Transfer News : नालंदा जिले में सात वर्षों से जिला स्तरीय कर्मचारियों का सामूहिक स्थानांतरण और पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई है. इससे कर्मचारियों में असंतोष है. बिहार सरकार ने हाल ही में नई एसओपी जारी की है, जिससे उम्मीद जगी है.

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Nalanda Employee Transfer News : नालंदा जिले में जिला स्तरीय कर्मचारियों एवं कर्मियों का सामूहिक स्थानांतरण और प्रोन्नति की प्रक्रिया पिछले करीब सात वर्षों से लंबित है. बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से एक ही प्रखंड और पंचायत में कार्यरत हैं. इससे कर्मचारियों में असंतोष है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 में भी सामूहिक तबादला और प्रोन्नति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा हुई थी, लेकिन यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद भी जिले में न तो सामूहिक स्थानांतरण किया गया और न ही कर्मचारियों को समय पर प्रोन्नति का लाभ मिल सका.

सरकार ने जारी की नई एसओपी

इस बीच बिहार सरकार ने गत 26 जून को सरकारी कर्मचारियों को उच्चतर पद का प्रभार (चार्ज ऑफ हायर पोस्ट) देने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है. सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमित प्रोन्नति का मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण अंतरिम व्यवस्था के तहत वरिष्ठता के आधार पर उच्च पद का प्रभार दिया जाएगा.

नई एसओपी के तहत कुल स्वीकृत पदों में 17 प्रतिशत पद सुरक्षित रखे जाएंगे, जिसमें अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए एक प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे. सुरक्षित पदों की गणना और प्रभार देने की प्रक्रिया भी दो चरणों में पूरी की जाएगी.

निष्पक्ष चुनाव के लिए तबादले की मांग

इधर, पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच नालंदा में सामूहिक स्थानांतरण का मुद्दा फिर चर्चा में है. संभावित चुनावी उम्मीदवारों का कहना है कि लंबे समय से एक ही क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों का स्थानांतरण कराया जाना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे.

कर्मचारियों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा नई एसओपी जारी किए जाने के बाद अब नालंदा में भी प्रोन्नति और सामूहिक स्थानांतरण की लंबित प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए. उनकी नजर अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है.

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Kanchan Kumar

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