नालंदा की बावन बूटी को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल, पर्यटन स्थलों पर बिक्री केंद्र और QR कोड लगाने की तैयारी

विश्व प्रसिद्ध बावन बूटी हस्तशिल्प की तस्वीर
Biharsharif News : नालंदा प्रशासन बावन बूटी हस्तशिल्प को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए नई पहल कर रहा है. अब पर्यटन स्थलों पर बिक्री केंद्र बनेंगे और हर उत्पाद पर QR कोड लगेगा.
Biharsharif News : नालंदा जिले की विश्व प्रसिद्ध बावन बूटी हस्तशिल्प कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है. शनिवार को बसवनबिगहा, बिहारशरीफ में आयोजित बावन बूटी कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को हरित पौधा और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करने के साथ हुई. इस अवसर पर बड़ी संख्या में बुनकर, शिल्पकार, नाबार्ड के पदाधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे.
बावन बूटी नालंदा की सांस्कृतिक पहचान : डीएम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने कहा कि बावन बूटी केवल एक हस्तशिल्प नहीं, बल्कि नालंदा की सांस्कृतिक विरासत और पहचान है. उन्होंने कहा कि इस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना समय की आवश्यकता है. जिला प्रशासन इस दिशा में हरसंभव प्रयास करेगा, ताकि बावन बूटी उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शन के लिए जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्थायी व्यवस्था की जा सके. इससे स्थानीय बुनकरों को बेहतर बाजार मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी.
पर्यटकों को उत्पाद के साथ मिलेगी उसकी पूरी कहानी
डीएम ने कहा कि किसी भी उत्पाद की सफलता केवल उसकी गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि उसकी प्रभावी प्रस्तुति और उससे जुड़ी कहानी पर भी निर्भर करती है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ऐसे प्रदर्शनी केंद्र विकसित किए जाएं, जहां पर्यटक उत्पाद खरीदने के साथ उसकी निर्माण प्रक्रिया, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी भी प्राप्त कर सकें. उन्होंने कहा कि प्रत्येक उत्पाद के साथ उसकी विशेषता, निर्माण में लगा समय, उसे तैयार करने वाले कारीगर, प्रयुक्त सामग्री और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का विवरण भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि खरीदार उत्पाद से भावनात्मक रूप से जुड़ सकें.
हर उत्पाद पर लगेगा QR कोड
उदिता सिंह ने प्रत्येक बावन बूटी उत्पाद पर QR कोड अंकित करने का सुझाव दिया. इसके माध्यम से खरीदार मोबाइल फोन से उत्पाद की निर्माण प्रक्रिया, कारीगरों की जानकारी, प्रयुक्त सामग्री तथा अन्य महत्वपूर्ण विवरण आसानी से देख सकेंगे. उन्होंने कहा कि इससे उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास भी मजबूत होगा.
डिजिटल प्रचार से मिलेगी वैश्विक पहचान
जिला पदाधिकारी ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन माध्यमों की मदद से बावन बूटी उत्पादों का प्रचार-प्रसार देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने का भी प्रयास करेगा, ताकि उत्पादन, विपणन और प्रचार-प्रसार को और अधिक मजबूत बनाया जा सके.
जीआई टैग का मिलेगा लाभ, ऑनलाइन बिक्री पर भी होगा काम
कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने बताया कि बावन बूटी को जीआई (GI) टैग मिलने के बाद सभी बुनकरों को इससे जोड़ा जाएगा, ताकि वे वैधानिक रूप से जीआई टैग का उपयोग कर सकें. उन्होंने कहा कि उत्पादों को विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा. साथ ही क्षेत्र में धागा उत्पादन इकाई स्थापित करने की संभावनाओं का भी परीक्षण किया जाएगा, जिससे बुनकरों को स्थानीय स्तर पर संसाधन उपलब्ध हो सकें.
बुनकरों ने रखीं समस्याएं और सुझाव
कार्यक्रम के दौरान बुनकर प्रतिनिधि नीतू कुमारी, सूरज देव, मणिकांत कुमार सहित अन्य कारीगरों ने अपनी समस्याएं और सुझाव जिला प्रशासन के समक्ष रखे. उन्होंने कहा कि उत्पादों की मार्केटिंग सबसे बड़ी चुनौती है. बुनकरों ने स्थायी बाजार उपलब्ध कराने, नई पीढ़ी को नियमित प्रशिक्षण देने तथा इस पारंपरिक शिल्प के संरक्षण के लिए विशेष पहल की मांग की. इसके अलावा उन्होंने अस्पतालों, रेलवे, सरकारी कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में बावन बूटी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, प्रमुख पर्यटन स्थलों और राज्य के प्रतिष्ठित होटलों में स्थायी बिक्री एवं प्रदर्शन स्टॉल उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया.
व्यावहारिक सुझावों पर होगी कार्रवाई
जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने बुनकरों को आश्वस्त किया कि उनके सभी व्यवहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन आवश्यक कार्रवाई कर नालंदा की इस गौरवशाली हस्तशिल्प परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है.
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