नालंदा में 35% से अधिक लोग तोड़ रहे ट्रैफिक नियम, नाबालिग चला रहे ई-रिक्शा, यातायात विभाग ने वसूला करोड़ों का जुर्माना
Published by : Sakshi kumari Updated At : 05 Jun 2026 7:43 AM
सांकेतिक तस्वीर
Nalanda News: यातायात विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 1,02,429 वाहनों की जांच में 35,861 से अधिक वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करते पाए गए, जो कुल जांचे गए वाहनों का लगभग 35.86 प्रतिशत है.
बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Nalanda News: नालंदा जिले में वर्ष 2025 के दौरान यातायात नियमों के पालन की स्थिति चिंताजनक रही. यातायात विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 1,02,429 वाहनों की जांच में 35,861 से अधिक वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करते पाए गए, जो कुल जांचे गए वाहनों का लगभग 35.86 प्रतिशत है. नियम तोड़ने वाले चालकों से वर्षभर में 8 करोड़ 26 लाख 63 हजार 900 रुपये का जुर्माना वसूला गया.
हेलमेट नहीं पहनने वालों से वसूला गया सबसे अधिक जुर्माना
यातायात विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों पर सबसे अधिक कार्रवाई हुई. केवल हेलमेट उल्लंघन के मामलों में 3 करोड़ 10 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया. वहीं अन्य यातायात अधिनियमों के उल्लंघन के मामलों में 4 करोड़ 36 लाख 77 हजार 900 रुपये की वसूली हुई, जो कुल जुर्माने का सबसे बड़ा हिस्सा है.
दोपहिया वाहन चालक रहे सबसे बड़े नियम उल्लंघनकर्ता
रिपोर्ट के अनुसार नियम तोड़ने वाले वाहनों में 36,550 दोपहिया वाहन शामिल थे, जबकि मात्र 179 चारपहिया वाहनों पर कार्रवाई दर्ज की गई. इससे स्पष्ट है कि जिले में यातायात नियमों के उल्लंघन की सबसे अधिक घटनाएं दोपहिया वाहन चालकों से जुड़ी हुई हैं. यातायात पुलिस ने मुख्य रूप से हेलमेट, सीट बेल्ट, मोबाइल उपयोग और गलत दिशा में वाहन चलाने के मामलों पर कार्रवाई की.
नाबालिग चालकों और स्कूली वाहनों की जांच नहीं होने पर उठे सवाल
वर्ष 2025 में यातायात प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार पूरे वर्ष न तो किसी स्कूली वाहन की जांच की गई और न ही किसी नाबालिग चालक के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई. जबकि जिले में किशोर अपराध, वाहन चोरी और शराब तस्करी के मामलों में नाबालिगों की संलिप्तता समय-समय पर सामने आती रही है.
सड़कों पर बढ़ रही नाबालिग ई-रिक्शा चालकों की संख्या
जिले में ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर वर्ष लगभग 2500 से 3000 नए ई-रिक्शा सड़कों पर उतर रहे हैं. चिंताजनक तथ्य यह है कि 18 से 20 प्रतिशत ई-रिक्शा नाबालिगों द्वारा चलाए जाने का अनुमान है. बिना लाइसेंस, ईयरफोन लगाकर या लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं.
बीमा जांच अभियान में शुरुआती तीन माह रहे सबसे सक्रिय
यातायात विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में सबसे अधिक बीमा जांच जनवरी से मार्च के बीच की गई. कुल 1,02,429 वाहनों में से लगभग 73 हजार वाहनों की जांच केवल पहले तीन महीनों में हुई. प्रशासन का मानना है कि बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच से दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
सीट बेल्ट और हेलमेट को लेकर जागरूकता अभी भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सीट बेल्ट और हेलमेट सड़क सुरक्षा के सबसे प्रभावी साधन हैं. इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन चालक इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं. सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है.
ट्रैफिक सिग्नल और सीसीटीवी से व्यवस्था सुधारने की कोशिश
बिहारशरीफ शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आठ प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं. इसके अलावा शहर के 141 स्थानों पर 550 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं. प्रशासन का दावा है कि ई-चालान और निगरानी व्यवस्था से यातायात अनुशासन में सुधार देखने को मिला है.
जागरूकता और कार्रवाई दोनों जरूरी
डीएसपी यातायात खुर्शीद आलम ने कहा कि विभाग नियमित रूप से वाहनों की जांच कर रहा है और विशेष अवसरों पर परिवहन विभाग के साथ संयुक्त अभियान भी चलाया जाता है. सड़क सुरक्षा माह के तहत वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए नियम उल्लंघन करने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
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By Sakshi kumari
साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.
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