चंडी-हरनौत ट्रांसमिशन लाइन शुरू, नालंदा के 9 क्षेत्रों में बेहतर होगी बिजली आपूर्ति

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फोटो : चंडी उपकेंद्र ग्रिड में मौजूद बिजली विभाग के पदाधिकारी  | Prabhat Khabar Network

चंडी उपकेंद्र ग्रिड में मौजूद बिजली विभाग के पदाधिकारी | Prabhat Khabar Network

नालंदा जिले में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. चंडी में नया 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र सफलतापूर्वक चालू हो गया है, जिससे नौ क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा. यह पहल राज्य के विकास को गति देगी.

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बिहार के विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क को और सशक्त बनाने की दिशा में बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (बीएसपीटीसीएल) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है.

कंपनी ने 29 जुलाई को नालंदा जिले के 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र, चंडी को सफलतापूर्वक ऊर्जान्वित कर दिया. इसके साथ ही 132 केवी डबल सर्किट चंडी–हरनौत ट्रांसमिशन लाइन और 50 एमवीए क्षमता के दो पावर ट्रांसफॉर्मर भी चालू कर दिए गए हैं.

नौ क्षेत्रों को मिलेगा सीधा फायदा

नए ग्रिड उपकेंद्र के शुरू होने से चंडी के साथ-साथ चैनपुर, बिरनावां, नगरनौसा, नूरसराय, भोभी, इंदौत, दियावां और थरथरी सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय और निर्बाध होगी. लंबे समय से इन इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या आम थी, अब उसमें काफी सुधार की उम्मीद है.

अधिकारियों के बयान और ऐतिहासिक कदम

ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (बीएसपीएचसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय कुमार यादव (भा.प्र.से.) ने कहा कि राज्य में मजबूत और आधुनिक विद्युत अवसंरचना विकसित करने का काम लगातार जारी है.

चंडी ग्रिड का चालू होना गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे राज्य के विकास को नई गति मिलेगी. बीएसपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी (भा.प्र.से.) ने कहा कि इस ग्रिड के शुरू होने से नालंदा जिले की ट्रांसमिशन व्यवस्था और मजबूत होगी.

इससे न सिर्फ बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि वोल्टेज में भी सुधार होगा. क्षेत्र के हजारों घरेलू, कृषि, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की बिजली मिल सकेगी.

भविष्य की मांग के लिए मजबूत तैयारी

नए उपकेंद्र से क्षेत्र में बढ़ते विद्युत भार का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा. ट्रांसमिशन नेटवर्क पर भार संतुलित होगा, जिससे ओवरलोडिंग की समस्या कम होगी और भविष्य में बढ़ने वाली बिजली मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा.

राज्य सरकार प्रदेश में ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण पर लगातार काम कर रही है. नए ग्रिड, लाइन और ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि हर उपभोक्ता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल सके.

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