पर्चा की जमीन पर चला बुलडोजर

करोड़ों की लागत से जिले के प्रसिद्ध सामस विष्णु धाम मंदिर के सौंदर्यकरण के दौरान एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है.
बरबीघा. करोड़ों की लागत से जिले के प्रसिद्ध सामस विष्णु धाम मंदिर के सौंदर्यकरण के दौरान एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है.सामस बुजुर्ग गांव के दलित परिवार के लोगों ने ठेकेदार के ऊपर गंभीर आरोप लगाते बताया कि जबरन उनके भूमि पर बुलडोजर चलवा दिया गया है.जमीन के ऊपर लगे पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया गया है.पीडितो ने कुछ पदाधिकारी पर ठेकेदार से मिली भगत करने का आरोप भी लगाया है. इस संबंध में ग्रामीण रामरतन रविदास, खेलावन रविदास, करीबन पासवान, उमा रविदास और जगदेव रविदास ने बताया कि लगभग 37 वर्ष पहले शेखपुरा के अनुमंडल पदाधिकारी के अनुशंसा उपरांत भू-बंदोबस्ती अंतर्गत हम सभी को एक एकड़ 10 डिसमिल जमीन आवंटित किया गया था.जमीन का पर्चा संख्या 3/1988-89 एवं थाना नंबर 26, खाता-1396 एवं खसरा 2051 बताया गया है.पीड़ितों ने बताया कि पूर्व में भी कुछ जमीन माफियाओं के द्वारा आवंटित भूमि को हड़पने का प्रयास किया गया,जिसको लेकर शेखपुरा के सिविल कोर्ट में टाइटल सूट 56/2020 दायरकिया गया है.सिविल कोर्ट शेखपुरा ने 15 मार्च 2021 को स्पष्ट आदेश पारित किया कि महादलित एवं दलित समुदाय को भू-बंदोबस्ती अंतर्गत दिया गया पर्चा अर्थात एक-एकड़ 10 डिसमिल जमीन पर जब तक माननीय न्यायालय का कोई अंतिम आदेश पारित ना हो जाए, उस पर कोई घेराबंदी यह निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा. इसके बावजूद ठेकेदार ने न्यायालय के आदेशों का अवहेलना करते हुए पीड़ितों के आवंटित भूमि पर जबरन जेसीबी चलाकर उनके पेड़ पौधों को नष्ट कर दिया गया.जब पीड़ित कोर्ट का आदेश लेकर निर्माण स्थल के पास पहुंचे तो उल्टे सभी को सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के मामले में जेल भेजने की धमकी दी गई.मामले को लेकर पीड़ितों के द्वारा जिलाधिकारी को आवेदन देकर न्याय की गुहार भी लगाई गई है.वही इस मामले पर बरबीघा के अंचलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि उन्होंने ठेकेदार को विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का कार्य करने का आदेश नहीं दिया है.अगर इस तरह का कोई बात है तो इस मामले की जांच की जाएगी.उधर इस संबंध में निर्माण करवा रहे विभाग के एक्सक्यूटिव इंजीनियर से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि वरीय पदाधिकारी के कथित आदेश पर जेसीबी चलाया गया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि पीड़ितों के आवेदन पर शेखपुरा के जिलाधिकारी क्या निर्णय लेते हैं. उधर पीड़ितों ने कहा है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह बाल बच्चों सहित निर्माण स्थल के नजदीक धरने पर बैठ जाएंगे. आपको बताते चलें कि वर्ष 2020 में उक्त भूमि पर ही पंचायत सरकार भवन बनाने के दौरान काफी विवाद हुआ था. इसके बाद पंचायत सरकार भवन के निर्माण स्थल को बदलना पड़ा था.
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