बाबा मणिराम लंगोट अर्पण मेला आज से,गाजे- बाजे के साथ जाकर शहरवासी करेंगे लंगोट अर्पण

बाबा मणिराम का शहर में भव्य मंदिर | Prabhat Khabar Network
बिहारशरीफ में बाबा मणिराम का प्रसिद्ध लंगोट अर्पण मेला आज से शुरू हो रहा है. श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ बाबा की समाधि पर लंगोट अर्पित कर मन्नतें मांगेंगे.
बाबा मणिराम की समाधि पर हर वर्ष लगने वाले लंगोट अर्पण मेले की शुरुआत इस वर्ष बुधवार से होने जा रही है. इस मेले को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है.
बाबा मणिराम के लंगोट अर्पण मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु गाजे-बाजे, हाथी, घोड़े, ऊंट आदि के साथ जुलूस के रूप में शामिल होते हैं.
श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ बाबा मणिराम के जयकारे लगाते हुए उनकी समाधि स्थल पर पहुँचकर लंगोट अर्पित करते हैं.
ऐसी मान्यता है कि बाबा मणिराम के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए हर शहरवासी इस नौ दिवसीय मेले में अवश्य दर्शन-पूजन के लिए पहुंचता है.
लंगोट अर्पण मेले की शुरुआत आषाढ़ पूर्णिमा के दिन से होती है. परंपरा के अनुसार, प्रथम दिन जिला प्रशासन, नालंदा के द्वारा पूरी आस्था के साथ बाबा को लंगोट अर्पित किया जाता है.
इसमें जिला पदाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक से लेकर सभी वरीय पदाधिकारी पूरे उत्साह के साथ शामिल होते हैं.
श्री बाबा मणिराम अखाड़ा न्यास समिति, बिहारशरीफ के उपाध्यक्ष अमरकांत भारती ने इस संबंध में बताया कि बाबा मणिराम एक महान संत थे.
वे 1238 ईस्वी में अयोध्या से बिहारशरीफ पहुंचे थे. उन्होंने 1300 ईस्वी में इसी स्थल पर जीवित समाधि ली थी.
बाबा मणिराम आजीवन जिलेवासियों को मल्लयुद्ध का प्रशिक्षण देते रहे थे. उनके प्रति जिलेवासियों की आस्था आज भी कम नहीं हुई है.
वैसे तो उनकी समाधि स्थल पर सदियों से लोग पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्वरूप में यहाँ 1952 से लंगोट अर्पण मेला आयोजित किया जा रहा है.
चमत्कारी संत थे बाबा मणिराम
बाबा मणिराम एक महान संत, सिद्ध योगी तथा विख्यात पहलवान थे. वे यहीं रहकर जीवन भर लोगों को मल्लयुद्ध का प्रशिक्षण देते रहे थे.
उनके चमत्कारों की कहानी आज भी जिलेवासियों की जुबान पर है. एक बार जब बाबा इसी स्थल पर एक दीवार पर बैठकर दातुन कर रहे थे, तो उन्होंने दीवार को ही चलने का आदेश दे दिया था और वह दीवार भी चलने लगी थी.
कहा जाता है कि उनके अन्य कई चमत्कारों के किस्से जिले में आज भी प्रचलित हैं, जिसे सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं.
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह भी पहुंचे थे बाबा के दरबार में
बाबा मणिराम की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह भी बाबा के दरबार में उपस्थित हुए थे.
इनके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी, स्व. राजीव गांधी, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सहित कई केंद्रीय मंत्री तथा बिहार सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित कई मंत्री समय-समय पर आ चुके हैं.
बाबा के दरबार में छोटे-बड़े का कोई भेदभाव नहीं रहता है. हर श्रद्धालु समान रूप से बाबा को लंगोट तथा प्रसाद अर्पित करता है.
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