Bihar Politics: शिक्षा मंत्री ने 'मंदिर' पर फिर दिए विवादित बयान, एनडीए का पलटवार, जदयू ने भी जतायी नाराजगी

Updated at : 09 Jan 2024 8:22 AM (IST)
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Bihar Politics: शिक्षा मंत्री ने 'मंदिर' पर फिर दिए विवादित बयान, एनडीए का पलटवार, जदयू ने भी जतायी नाराजगी

Bihar Politics शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने कहा है कि मंदिर का रास्ता मानसिक गुलामी का रास्ता है. स्कूल का रास्ता प्रकाश का रास्ता दिखाता है. पढ़िए शिक्षा मंत्री के बयान के बाद बिहार में कैसे सियासी हलचलें तेज हो गई है.

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डेहरी में आयोजित सावित्रीबाई फुले जयंती समारोह में शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने मंदिर को लेकर टिप्पणी की. उनके इस बयान के बाद राज्य में सियासत गरमा गयी है. शिक्षा मंत्री पहले भी अपने बयानों को लेकर विवाद के केंद्र में रहे हैं. उनके बयान पर एनडीए हमलावर हो गया है. यहां तक कि महागठबंध में शामिल जदयू ने भी नाराजगी जतायी है.

मंदिर का रास्ता मानसिक गुलामी का है: प्रो चंद्रशेखर

शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने कहा है कि मंदिर का रास्ता मानसिक गुलामी का रास्ता है. स्कूल का रास्ता प्रकाश का रास्ता दिखाता है. उन्होंने इस विचारधारा के विरोधियों को खबरदार करते हुए कहा कि अब एकलव्य का बेटा अंगूठा दान नहीं करेगा. अब वह जवाब देगा. उन्होंने यह बात डेहरी में आयोजित सावित्री बाई फुले जयंती समारोह में सोमवार को कही.

जगदेव प्रसाद का बेटा अब आहूति देगा नहीं, बल्कि लेगा

शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि शहीद जगदेव प्रसाद का बेटा अब आहूति देगा नहीं, बल्कि लेगा. उन्होंने कहा कि अगर जुर्रत की गयी तो 90 फीसदी बहुजन समाज के पसीने से ऐसा समुद्र खड़ा होगा कि सात समुंदर पार नजर आओगे. 24 में भी नजर नहीं आओगे. उन्होंने समाज सुधारक सावित्री बाई फुले के विचारों के आधार पर अपनी पार्टी के विधायक फतेह बहादुर की तरफ से कही गयी बातों का समर्थन किया. कहा कि उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की गयी. इसके लिए उन्होंने संबंधित लोगों को खबरदार भी किया.

ईश्वर किसी जाति के दास नहीं हैं

शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने एक्स हैंडल पर कहा है कि ईश्वर किसी जाति के दास नहीं हैं, अगर ऐसा होता तो अछूत कुल में पैदा हुई माता सावित्री बाई फूले नारी शिक्षा की प्रतीक व भारत की पहली महिला शिक्षिका नहीं हो पातीं.

धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना जरूरी : नीरज कुमार

इधर, जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि कौन क्या बयान दे रहे हैं,उनके लिए ,उनके टीआरपी के लिए और जीवन के दोहरा चरित्र के लिए महत्वपूर्ण है. एक सवाल के जवाब में कहा कि शिक्षा प्रकाश की ओर ले जाता है. ज्ञान होने के लिए लोगों को धार्मिक ग्रंथों के प्रति सम्मान का भाव रखने की जरूरत है. कहा कि यदि ज्ञान ही नहीं रहेगा तो धर्मिक ग्रंथ कैसे पढ़ेगा.

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मंदिर सांस्कृतिक आजादी का रास्ता है : नित्यानंद राय

बीजेपी नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि घमंडिया गठबंधन वोट की खातिर बाबर और अफजल गुरु की भी पूजा करने से परहेज नहीं करेंगे, लेकिन देश को बाबर और अफजल गुरु की नहीं अशफाक उल्ला खान और कैप्टन हमीद जैसे लोगों की जरूरत है. सोमवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काल में श्रीराम के मंदिर बने, गरीबों को घर मिला, आधुनिक अस्पताल भी बने. यह सिलसिला जारी है.

मुखौटा कोई और है

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि श्रीराम मंदिर सांस्कृतिक आजादी का रास्ता है. पता नहीं, इन लोगों को प्रभु श्रीराम से क्या नफरत है कि बार-बार इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बयान देने वाला चेहरा भले ही शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर या फिर राजद के विधायक हैं, लेकिन इसके पीछे का मुखौटा कोई और है. महागठबंधन के जो भी नेता प्रभु श्री राम और राम मंदिर के खिलाफ बयान दे रहे हैं, वो सीधे-सीधे लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव और घमंडिया गठबंधन के इशारे पर बोल रहे हैं.

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