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Bihar Politics: दही-चूड़ा की थाली में सियासत की राजनीति, बिहार में भोज के बहाने नए समीकरणों की खेल

Updated at : 15 Jan 2026 1:01 PM (IST)
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Bihar Politics: दही-चूड़ा की थाली में सियासत की राजनीति, बिहार में भोज के बहाने नए समीकरणों की खेल

Bihar Politics

Bihar Politics: बिहार में जब थाली में दही-चूड़ा परोसा गया, तो साथ में परोसी गई सियासी रणनीति भी. बिहार की राजनीति में इस बार मकर संक्रांति सिर्फ पर्व नहीं, बल्कि शक्ति-संतुलन और संदेशों का मंच बन गई.

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Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार दही-चूड़ा भोज ने राजनीति को नई धार दी है. जदयू, भाजपा और कांग्रेस के भोज के बीच लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव के आयोजन ने राजनीतिक गलियारों में खास हलचल पैदा कर दी. यह सिर्फ एक पारंपरिक भोज नहीं, बल्कि बदलते समीकरणों और अंदरूनी संतुलन को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

दही-चूड़ा के बहाने सियासी मेलजोल

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में एक अलग ही रंग दिखा. अलग-अलग दलों के नेताओं ने एक-दूसरे के यहां पहुंचकर यह संदेश दिया कि चुनावी तल्खियों के बाद भी संवाद और सौहार्द की गुंजाइश बनी हुई है. दही की मिठास को कभी-कभी जुबानी जंग ने खट्टा करने की कोशिश जरूर की, लेकिन कुल मिलाकर सियासी मिठास कायम रही.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये भोज अब सिर्फ सामाजिक परंपरा नहीं रह गए हैं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति का मंच बन चुके हैं. कौन किसके यहां गया, कौन नहीं गया, और किसने दूरी बनाई—इन सबका राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है.

तेजप्रताप यादव का भोज और लालू का संतुलन

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा तेजप्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज की रही. राजद की ओर से औपचारिक रूप से भोज का आयोजन नहीं होने के बावजूद तेजप्रताप के आयोजन ने पार्टी के अंदरूनी हालात पर रोशनी डाली. इस भोज में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी को संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा गया.

लालू यादव तेजप्रताप के साथ

हालांकि राबड़ी देवी का नहीं आना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा. तेजस्वी यादव की दूरी पहले से ही तय मानी जा रही थी, लेकिन राबड़ी देवी की गैरहाजिरी ने कई सवाल खड़े कर दिए. उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, जदयू मंत्री अशोक चौधरी और विधायक चेतन आनंद की मौजूदगी ने इस भोज को और दिलचस्प बना दिया.

जदयू-भाजपा का शक्ति प्रदर्शन

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के यहां आयोजित भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत भाजपा और जदयू के तमाम बड़े नेता पहुंचे. इसे साफ तौर पर शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया. इसके बाद जदयू विधायक रत्नेश सदा के भोज में भी पार्टी के दिग्गजों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि सत्ताधारी गठबंधन पूरी तरह एकजुट है.

नीतीश कुमार के साथ विजय सिन्हा

भाजपा दफ्तर में हुए भोज और नितिन नवीन के प्रस्तावित आयोजन को पहले ही “सुपरहिट” बताया जा रहा है, जो पार्टी के भीतर आत्मविश्वास को दर्शाता है.

कांग्रेस का भोज और अलग-थलग पड़ती तस्वीर

कांग्रेस ने सदाकत आश्रम में पूरे उत्साह के साथ भोज का आयोजन किया, लेकिन इसमें एक भी विधायक का नहीं पहुंचना पार्टी की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है. इसके बाद कांग्रेस में टूट की चर्चाएं तेज हो गईं, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने अपने हौसले कमजोर नहीं होने दिए.

मकर संक्रांति पर आज चिराग पासवान का चूड़ा-दही भोज

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से आज चूड़ा दही भोज का आयोजन किया गया है. इस खास मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान खुद मौजूद रहेंगे. चिराग पासवान के द्वारा दिए जाने वाले भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के मंत्री और गठबंधन के सभी वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रण भेजा गया है.

नीतीश कुमार के साथ चिराग पासवान

यह मकर संक्रांति चिराग पासवान के लिए कई मायनों में खास है. लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने बेहतर प्रदर्शन किया है. पार्टी के 19 विधायक विधानसभा पहुंचे हैं, जो चिराग पासवान के नेतृत्व को मजबूत जनसमर्थन मिलने के रूप में देखा जा रहा है. यही नहीं, पार्टी के दो विधायक बिहार सरकार में मंत्री भी बने हैं, जिससे सरकार में पार्टी की भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़े हैं.

सुशील मोदी और पुराने भोज की याद

इस सियासी भोज के दौर में दिवंगत सुशील मोदी के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज को भी याद किया गया. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव के आयोजन की कमी भी नेताओं और पत्रकारों को खली. इससे साफ है कि बिहार की राजनीति में ये भोज सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि परंपरा और पहचान बन चुके हैं.

दही-चूड़ा की थाली इस बार बिहार की राजनीति में संवाद, दूरी और संतुलन, तीनों का प्रतीक बन गई. हर भोज अपने साथ एक राजनीतिक संदेश लेकर आया और यही कारण है कि ये आयोजन अब सामान्य सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं.

Also Read: दही-चूड़ा, लालू का आशीर्वाद और तेजस्वी की गैरहाजिरी, क्या तेज प्रताप ने इसी भोज के जरिए फेंक दिया अगले 5 साल का पासा?

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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