बिहार में राजस्व कर्मचारी अब कहलाएंगे असिस्टेंट रिवेन्यू ऑफिसर, पदनाम बदलने पर लगी मुहर

बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
Bihar News: बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और हड़ताली कर्मचारियों के बीच चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, कर्मचारियों की प्रमुख मांग पदनाम बदलने पर सरकार ने सहमति दे दी है. अब राज्य के राजस्व कर्मचारी सहायक राजस्व अधिकारी यानी असिस्टेंट रिवेन्यू ऑफिसर के नाम से जाने जाएंगे.
Bihar News: बिहार में सालों से जमीन-जायदाद के कागजात को संभालने वाले राजस्व कर्मचारी अब एक नई पहचान के साथ नजर आएंगे, विभाग और हड़ताली कर्मचारियों के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मीटिंग में न केवल पदनाम बदलने पर सहमति बनी है, बल्कि निलंबन वापसी के भी आदेश जारी हो गए हैं.
पदनाम बदलेगा, पहचान भी बदलेगी
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में लंबे समय से चल रही खींचतान अब समझौते की ओर बढ़ती दिख रही है. विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और कर्मचारी संघ के बीच हुई वार्ता में सबसे बड़ा फैसला पदनाम को लेकर लिया गया है, अब राज्य के राजस्व कर्मचारियों को सहायक राजस्व अधिकारी के नाम से जाना जाएगा.
प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया है कि वे इस बदलाव की आधिकारिक अनुशंसा मुख्यमंत्री को भेजेंगे, जिससे जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग सकती है.
निलंबन की तलवार भी हटी
फरवरी से जारी हड़ताल की वजह से राज्यभर में भूमि सुधार और अन्य प्रशासनिक कार्य ठप पड़े थे. अब सरकार ने लचीला रुख अपनाते हुए हड़ताल की अवधि को छुट्टी में में एडजस्ट करने का निर्णय लिया है, ताकि कर्मचारियों की सेवा पर कोई आंच न आए.
इससे भी बड़ी राहत उन कर्मियों के लिए है जिन्हें हड़ताल के दौरान निलंबित कर दिया गया था. अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर अनुशंसा की है कि आगामी जनगणना कार्यों की महत्ता को देखते हुए इन कर्मियों को तत्काल निलंबन मुक्त किया जाए, ताकि वे वापस काम पर लौट सकें.
सम्राट चौधरी का सकारात्मक रुख
राजस्व सेवा संघ के प्रवक्ताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार का रवैया सकारात्मक है. जहां कर्मचारियों का मुद्दा सुलझता दिख रहा है, वहीं अधिकारी संवर्ग ने भी अपनी पुरानी मांग दोहरा दी है.
वे चाहते हैं कि उनके संवर्ग के अधिकारियों को डीसीएलआर (DCLR) पद पर प्रोन्नति दी जाए, जिस पर हाईकोर्ट के आदेश भी उनके पक्ष में बताए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि वे पूरे मनोयोग से जनता की सेवा के लिए तैयार हैं, बस उन्हें उचित अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए.
आगे क्या होगा?
जमीन के विवादों और म्यूटेशन जैसे कार्यों के लिए जनता महीनों से परेशान थी. अब कर्मचारियों के निलंबन मुक्त होने और पदनाम बदलने की सहमति से यह उम्मीद जगी है कि अंचल कार्यालयों में ताले खुलेंगे और काम की रफ्तार बढ़ेगी.
सरकार का यह कदम जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को भी समय पर पूरा करने में मदद करेगा. अगर सब कुछ ठीक रहा और मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, तो बिहार का राजस्व विभाग एक नए स्वरूप और ऊर्जा के साथ काम करता नजर आएगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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