Bihar News: कैदियों के हाथों की मेहनत अब बाजार में, खादी मॉल और बिहार संग्रहालय में बिकेंगे मुक्ति ब्रांड के उत्पाद

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Bihar News: अब जब आप खादी मॉल या बिहार संग्रहालय से कोई सामान खरीदेंगे, तो वह सिर्फ एक उत्पाद नहीं होगा, बल्कि किसी बंदी के नए जीवन की उम्मीद और आत्मनिर्भरता की कहानी भी अपने साथ लेकर जाएगा.

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Bihar News: बेऊर जेल समेत बिहार की जेलों में बंद कैदियों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद अब सीधे आम लोगों तक पहुंचेंगे. गांधी मैदान स्थित खादी मॉल और बिहार संग्रहालय की हैंडीक्राफ्ट दुकान में मुक्ति ब्रांड के तहत इन उत्पादों की बिक्री शुरू कर दी गई है.

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मंगलवार को गृह सचिव सह कारा महानिरीक्षक प्रणव कुमार ने खादी मॉल में इस पहल का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि यह पहल कैदियों के कौशल विकास, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को नई पहचान देने का काम करेगी.

खादी मॉल में पहुंचे खाद्य उत्पाद, संग्रहालय में हस्तशिल्प

खादी मॉल में कैदियों द्वारा बनाए गए सरसों का तेल, चना सत्तू, हल्दी, धनिया, काली मिर्च और लाल मिर्च जैसे शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराए गए हैं. वहीं बिहार संग्रहालय की हैंडीक्राफ्ट दुकान में बांस से बने खूबसूरत हस्तशिल्प उत्पाद रखे गए हैं. इन उत्पादों को देखकर साफ झलकता है कि कैदियों ने मेहनत के साथ-साथ रचनात्मकता का भी बेहतरीन परिचय दिया है.

‘मुक्ति’ ब्रांड, नई शुरुआत का प्रतीक

गृह सचिव सह कारा महानिरीक्षक प्रणव कुमार ने कहा कि जेलों में तैयार सभी उत्पाद ‘मुक्ति’ ब्रांड नाम से बाजार में उतारे गए हैं. यह नाम अपने आप में एक संदेश है, जो आत्मनिर्भरता और नए जीवन की ओर बढ़ने का प्रतीक बनता है. उन्होंने बताया कि इन उत्पादों की गुणवत्ता उच्च स्तर की है और इन्हें पूरी तरह बंदियों द्वारा ही तैयार किया गया है.

बंदियों को पारिश्रमिक, पीड़ित परिवारों को भी सहारा

इस पहल की खास बात यह है कि उत्पाद बनाने के बदले बंदियों को पारिश्रमिक दिया जाता है. इसके साथ ही इस राशि का एक हिस्सा पीड़ित परिवारों को भी उपलब्ध कराया जाता है. यानी ‘मुक्ति’ ब्रांड का कोई भी उत्पाद खरीदने पर एक बंदी को रोजगार का अवसर मिलता है, एक परिवार को सहारा मिलता है और समाज को एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का मौका मिलता है.

बिहार संग्रहालय बनेगा बड़ा मंच

बिहार संग्रहालय के महानिदेशक और पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि कैदियों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प उत्पाद बेहद सुंदर और गुणवत्तापूर्ण हैं. इन्हें संग्रहालय की हैंडीक्राफ्ट दुकान में रखने का उद्देश्य यह है कि ये उत्पाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों तक भी पहुंच सकें. उन्होंने बताया कि बिहार संग्रहालय में हर साल करीब दो करोड़ रुपये के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की बिक्री होती है, जिससे ‘मुक्ति’ ब्रांड को भी बड़ा बाजार मिलेगा.
यह पहल सिर्फ उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जेल सुधार की दिशा में एक सकारात्मक सोच को दर्शाती है. इससे कैदियों को सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका मिलेगा और समाज में दोबारा जुड़ने का रास्ता आसान होगा.

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