सिवान से नवादा तक धधके गेहूं के खेत,कई एकड़ से ज्यादा फसल खाक

बिहार के अलग-अलग जिलों में गेहूं के खेतों में लगी आग
Bihar News: बिहार के अलग-अलग जिलों में आग ने किसानों की कमर तोड़ दी है. सीवान, रोहतास और नवादा में लगी भीषण आग ने सैकड़ों एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल को जलाकर राख कर दिया. कहीं शॉर्ट सर्किट तो कहीं तेज हवा ने आग को और भड़काया, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
Bihar News: बिहार में पछुआ हवाओं के साथ ही खेतों में आग लगने की घटनाओं ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है. शुक्रवार के दिन सिवान, रोहतास और नवादा जिलों में भीषण आग लगने से गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई.
किसानों की साल भर की मेहनत मिनटों में धुएं में तब्दील हो गई. सबसे ज्यादा तबाही सिवान और कोचस (रोहतास) में देखने को मिली, जहां सैकड़ों मन अनाज जलने से किसानों के सामने अब दाने-दाने का संकट खड़ा हो गया है.
सिवान-10 बीघा खेत में मची तबाही
सिवान जिले के आंदर अंचल अंतर्गत पड़ेजी गांव में शुक्रवार को बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण गेहूं के खेत में आग लग गई. जयजोर पंचायत के गांव में अचानक निकली चिंगारी ने देखते ही देखते 10 बीघा में लगी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया. आग की लपटें इतनी तेज थीं कि ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पेड़ों की डालियों से आग बुझाने की कोशिश की.
इस अग्निकांड में ललन साह, शिवसेवक पांडेय, ददन मांझी और कृष्णा राम समेत दर्जनों किसानों की फसल बर्बाद हो गई. घटना के बाद जदयू जिला सचिव सुशील गुप्ता ने अंचलाधिकारी से मुआवजे की मांग की है, जिसके बाद राजस्व कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया.
कोचस और नवादा में हाहाकार
रोहतास जिले के कोचस थाना क्षेत्र के सरेयां गांव के बधार में आग ने और भी भयावह रूप ले लिया. यहां लगभग 50 एकड़ से अधिक खेत में खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई. घंटों की मशक्कत और किसानों के भारी शोर-शराबे के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक खेत के खेत काले मरुस्थल में बदल चुके थे.
नवादा के काशीचक प्रखंड के बेलर गांव में भी आग ने भारी तांडव मचाया. ग्रामीण दमकल विभाग का इंतजार करते रहे और अपनी आंखों के सामने अपनी गाढ़ी कमाई को जलते हुए देखते रहे.
मुआवजे की आस में अन्नदाता
इन घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों और बिजली विभाग की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गर्मी के मौसम में ढीले लटकते बिजली के तार किसानों के लिए काल बन रहे हैं. प्रभावित किसानों ने सरकार से अविलंब उचित मुआवजे की गुहार लगाई है ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें.
कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन अब नुकसान का आकलन करने में जुटा है, लेकिन जो दर्द इन अन्नदाताओं ने झेला है, उसकी भरपाई केवल कागजी कार्रवाई से मुमकिन नहीं दिखती. (सीवान से अरविंद सिन्हा, सासाराम से रमेश कुमार पाण्डेय और नवादा से विशाल कुमार की रिपोर्ट.)
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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