Bihar News: आज आर्थिक सर्वे होगा पेश, देश का सबसे गरीब राज्य बना बिहार, RJD ने पूछा- 20 साल का हिसाब दो

Updated at : 02 Feb 2026 11:48 AM (IST)
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Nitish Kumar

Nitish Kumar

Bihar News: भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में बिहार सबसे निचले पायदान पर है. राज्य में प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय 70 हजार रुपये से भी कम बताई गई है. विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे अधूरी तस्वीर कहकर बचाव कर रहा है.

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Bihar News: बिहार विधानसभा के बजट सत्र की आज से शुरूआत हुई. सेंट्रल हॉल में राज्यपाल का अभिभाषण होगा. वहीं सरकार की ओर से आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा. आम बजट से ठीक पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण ने बिहार की अर्थव्यवस्था को ऐसा आईना दिखाया है, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों को असहज कर दिया है.

सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश का सबसे गरीब राज्य साबित हुआ है. इस खुलासे के बाद सवाल सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे 20 साल की राजनीतिक हुकूमत पर जा टिके हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण की दो तस्वीरें

सर्वेक्षण यह भी बताता है कि बिहार पूरी तरह ठहरा हुआ राज्य नहीं है. वर्ष 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये आंका गया है. विकास दर 13.07 फीसदी रही है, जो देश के 22 राज्यों से अधिक है.

लेकिन चिंता की बात यह है कि बिहार अपनी ही पिछली तीन वर्षों की विकास रफ्तार से फिसल गया है. यानी विकास हो रहा है, मगर अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा.

इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाकर राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला है. राजद प्रवक्ता शक्ति यादव का कहना है कि जब पिछले 20 वर्षों से सत्ता की कमान एक ही नेतृत्व के हाथ में है, तो हर नाकामी का दोष पिछली सरकारों पर डालना अब स्वीकार्य नहीं है. अगर दो दशक बाद भी बिहार सबसे गरीब राज्य है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

जदयू का बचाव- संदर्भ में देखें आंकड़े

सत्ताधारी जदयू विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है. जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि नीतीश कुमार ने ‘माइंस में पड़े बिहार’ को बाहर निकाला है. उनके मुताबिक, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधारों में बिहार ने बड़ी छलांग लगाई है और आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए.

आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है. एक तरफ गरीबी का कठोर सच है, दूसरी ओर विकास की उम्मीदें. सवाल यही है कि क्या ये आंकड़े आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बनेंगे, या फिर बहस सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह जाएगी. लेकिन आम जनता के मन में गूंजता सवाल अब और तेज हो गया है. बीस साल में क्या वाकई बिहार की किस्मत बदली?

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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