Budget 2026: SHE-Mart योजना से बिहार की जीविका दीदी बनेंगी बिजनेस विमेन

Updated at : 02 Feb 2026 10:22 AM (IST)
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Budget 2026-SHE-Mart scheme will make Bihar's Jeevika Didi business women

Budget 2026- SHE-Mart scheme will make Bihar's Jeevika Didi business women

Budget 2026: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए ‘स्वयं सहायता उद्यम मार्ट’ (शी मार्ट) योजना की घोषणा कर दी है. खास बात यह है कि इस योजना का सबसे बड़ा लाभ बिहार की जीविका दीदियों को मिल सकता है, लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता के बाद यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में अगला बड़ा प्रयोग माना जा रहा है.

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Budget 2026: बिहार की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली जीविका दीदियों के लिए केंद्र सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है. बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘स्वयं सहायता उद्यम मार्ट’ (SHE-Mart) योजना का एलान किया है, जिसका सबसे बड़ा जैकपॉट बिहार के हाथ लग सकता है.

अब गांव की गलियों में सिलाई-कढ़ाई और अचार-पापड़ बनाने वाली महिलाएं सिर्फ कारीगर नहीं, बल्कि बड़े शोरूम और मार्केट की मालकिन बनेंगी. लखपति दीदी की सफलता के बाद यह कदम बिहार की 31 लाख से अधिक महिलाओं की जिंदगी बदलने वाला साबित होगा.

क्यों बिहार बना इस योजना का मजबूत दावेदार

बिहार में वर्ष 2006 से जीविका समूह सक्रिय हैं और राज्य सरकार के सहयोग से इनका नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है. आज बिहार में 31 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. यही वजह है कि स्वयं सहायता उद्यम मार्ट जैसी योजना के लिए बिहार पहले से तैयार ज़मीन पर खड़ा दिखता है.

इस योजना के तहत जीविका के क्लस्टर स्तरीय संघों को खुदरा बाजार की सुविधा दी जाएगी, जहां वे अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगी. इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और महिलाओं की आमदनी में सीधा इजाफा होगा.

क्या है ‘शी मार्ट’ और कैसे बदलेगी तस्वीर

शी मार्ट दरअसल महिलाओं के लिए समर्पित ऐसा बाजार या प्लेटफॉर्म होगा, जहां स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा. ग्रामीण महिलाएं कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और छोटे व्यवसायों से जुड़े उत्पादों को बाजार में उतार सकेंगी.

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महिलाएं केवल उत्पादक नहीं, बल्कि मालकिन की भूमिका में होंगी. उन्हें ऋण, प्रशिक्षण, विपणन और ब्रांडिंग तक की सुविधा दी जाएगी, ताकि उनका काम स्थानीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सके.

रोजगार, पहचान और आत्मनिर्भरता की नई राह

शी मार्ट के जरिए गांवों और कस्बों में बनने वाले उत्पादों को नया बाजार मिलेगा. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और महिला नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

बिहार सरकार पहले से जीविका दीदियों के लिए कई योजनाएं चला रही है, ऐसे में केंद्र की यह पहल राज्य की महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह खोल सकती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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