Bihar: बदलेगा पारिवारिक बंटवारा कानून, बोले मंत्री- अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे प्रवासी भाई

पारिवारिक बंटवारा के लिए परिवार में सर्वसम्मति बनाने की जरूरत नहीं होगी. कानूनी बंटवारे में तो यह व्यवस्था पहले से है, लेकिन सरकर अब खानगी (पंचायत आधरित) बंटवारा में यह व्यवस्था करने जा रही है.
पटना. राज्य में जमीन और संपत्ति विवाद की समस्या दूर करने के लिए पारिवारिक बंटवारा कानून में संशोधन होगा. इसके लिए परिवार में सर्वसम्मति बनाने की जरूरत नहीं होगी. कानूनी बंटवारे में तो यह व्यवस्था पहले से है, लेकिन सरकर अब खानगी (पंचायत आधरित) बंटवारा में यह व्यवस्था करने जा रही है.
राजस्व व भूमि सुधार मंत्री राम सूरत कुमार ने बुधवार को विधान परिषद में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जल्द ही लागू हो जाएगी. इसपर काम हो रहा है. फिलहाल मानवबल कम है, इसकी संख्या बढ़ने पर काम शुरू होगा. मंत्री बुधवार को परिषद में रामचंद्र पूर्वे के अल्पसूचित प्रश्न का जवाब दे रहे थे.
मंत्री रामसूरत कुमार ने कहा कि अगर चार भाइयों में कोई एक बंटवारा नहीं चाहता है, तो चौथे भाई को नोटिस दी जाएगी. नोटिस मिलने के बाद घर से दूर रहने वाले भाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा होगी. फिर भी अगर वो उपस्थित नहीं हुए तो सभी प्लॉट में उनका हिस्सा निकाल दिया जाएगा और बहुमत के आधार पर बंटवारा हो जाएगा. यह इसकी वीडियोग्राफी भी होगी. हालांकि इस प्रारूप को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है.
तकनीकी अड़चनों को दूर करने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. इसकी शर्त यही होगी कि पंचों में पंचायत प्रतिनिधियों का होना जरूरी होगा. बंटवारे की व्यवस्था में न्यायमित्र, पंच और सरपंच को भी रखा जाएगा ताकि किसी को कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सके.
मंत्री रामसूरत कुमार ने कहा कि दाखिल खारिज का आवेदन किस स्थिति में अस्वीकृत करना है, इसके दिशा-निर्देश की सूची अंचल कार्यालयों को दी गई है. इससे अलग हटकर कोई आवेदन निरस्त नहीं कर सकता है. मंत्री ने कहा कि दाखिल खारिज के 72 लाख 28 हजार 241 आवेदनों में 62 लाख 48 हजार 335 का निष्पादन कर दिया गया है. शेष के निष्पादन की प्रक्रिया चल रही है.
इसी प्रकार परिमार्जन पोर्टल पर 16 लाख 75 हजार 498 आवेदन मिले हैं. 14 लाख 68 हजार 766 का निष्पादन कर दिया गया. ऑनलाइन लगान के 33 लाख 75 हजार 533 आवेदनों में सबकी रसीद कट गई इससे 70 करोड़ से अधिक रुपये सरकार को राजस्व के रूप में मिले. जल निकायों पर अतिक्रिमण के 49 हजार 266 मामले चिह्नित थे जिनमें 42 हजार 408 पर अतिक्रमण हटा दिया गया.
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