Bihar News: एग्री स्टैक से जुड़े किसानों को बड़ी राहत! अब चुटकियों में बनेगी Farmer ID, परिमार्जन प्लस के आवेदनों पर सरकार का बड़ा एक्शन
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 16 Jan 2026 2:35 PM
AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: अब किसानों को फार्मर आईडी के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकना नहीं पड़ेगा. जमीन के रिकॉर्ड में छोटी-सी गलती भी अब उनकी राह की सबसे बड़ी रुकावट नहीं बनेगी. एग्री स्टैक से जुड़े मामलों में सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जो सीधे किसानों की रोजमर्रा की परेशानियों पर असर डालने वाला है.
Bihar News: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एग्री स्टैक और किसानों से जुड़े परिमार्जन प्लस के सभी आवेदनों को फास्ट ट्रैक पर निपटाने का निर्णय लिया है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर लिए गए इस फैसले के तहत डिजिटाइज्ड जमाबंदी में त्रुटि, रिकॉर्ड अपडेट न होने और फार्मर आईडी से जुड़े सभी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. इससे हजारों किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने का रास्ता अब कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाला है.
खेत से लेकर सरकारी दफ्तरों तक भटक रहे किसानों के लिए अब राहत की खबर है. एग्री स्टैक और फार्मर आईडी से जुड़े मामलों में जो अड़चनें अब तक किसानों की परेशानी बढ़ा रही थीं, उन्हें खत्म करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राजस्व महा अभियान के दौरान परिमार्जन प्लस के तहत आए सभी एग्री स्टैक से जुड़े आवेदनों को अब सर्वोच्च प्राथमिकता पर निपटाया जाएगा. इससे न सिर्फ फार्मर आईडी बनवाने की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर मिल सकेगा.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन किसानों की डिजिटाइज्ड जमाबंदी अद्यतन नहीं है या जिन रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं, उनके आवेदन अब लंबित नहीं रखे जाएंगे. उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया है कि ऐसे मामलों को फास्ट ट्रैक मोड में निबटाया जाएगा.
एग्री स्टैक अभियान में सामने आई बड़ी परेशानी
एग्री स्टैक महाअभियान के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य के हजारों किसान केवल इसलिए फार्मर आईडी नहीं बनवा पा रहे हैं, क्योंकि उनके जमीन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड अधूरे हैं या उनमें त्रुटियां हैं. जमाबंदी अपडेट न होने, नाम या खाता संख्या में गड़बड़ी और भूमि विवरण में विसंगतियों के कारण किसानों को बार-बार अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने स्पष्ट किया है कि यही कारण है कि परिमार्जन प्लस के तहत प्राप्त ऐसे सभी आवेदन, जिनका सीधा संबंध किसानों और एग्री स्टैक से है, उन्हें अब सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी किसान केवल तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से सरकारी योजनाओं से वंचित न रह जाए.
जिलों को मिले सख्त निर्देश, तुरंत कार्रवाई के आदेश
विभाग की ओर से सभी जिला समाहर्ताओं को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में अंचल अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से ऐसे आवेदनों का निष्पादन कराने का आदेश दें. इस काम को अति आवश्यक श्रेणी में रखा गया है, ताकि किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए.
सरकार का मानना है कि एग्री स्टैक केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि किसानों को योजनाओं, सब्सिडी और सहायता से जोड़ने की रीढ़ है. अगर जमीन के रिकॉर्ड ही दुरुस्त नहीं होंगे, तो फार्मर आईडी, पीएम किसान, फसल बीमा और अन्य योजनाओं का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा.
किसानों के लिए क्यों है यह फैसला बेहद अहम
इस निर्णय से उन किसानों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी जो अब तक फार्मर आईडी नहीं बनवा पाने के कारण कई योजनाओं से बाहर थे. परिमार्जन प्लस के आवेदनों के त्वरित निबटारे से न केवल जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सुधरेंगे, बल्कि एग्री स्टैक को भी मजबूत आधार मिलेगा.
सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब प्रशासनिक लापरवाही या डिजिटल खामियों की कीमत किसानों को नहीं चुकानी पड़ेगी. एग्री स्टैक से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देना दरअसल किसानों के भरोसे को फिर से मजबूत करने की कोशिश है, ताकि तकनीक उनके लिए बाधा नहीं, बल्कि सहारा बन सके.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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