बिहार में 41 CO पर एक्शन, सरकार ने किया सस्पेंड

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
Bihar News: बिहार में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने हड़ताल और सरकारी कार्यक्रमों से दूरी बनाने वाले 41 CO को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. इस कार्रवाई ने न सिर्फ नौकरशाही में हलचल मचा दी है, बल्कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव को भी तेज कर दिया है.
Bihar News: बिहार के प्रशासनिक गलियारे में उस वक्त खलबली मच गई जब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक साथ 41 CO को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उन अफसरों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी कार्यों और जन सरोकार के कार्यक्रमों में बाधा बन रहे थे.
सरकार ने साफ कर दिया है कि जनता के काम में कोताही और अनुशासन तोड़ना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
नो वर्क, नो टॉलरेंस
राज्य सरकार की इस कार्रवाई को साफ तौर पर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. जिन अंचल CO को सस्पेंड किया गया है, उन पर आरोप है कि उन्होंने हड़ताल में हिस्सा लिया, मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा में बाधा पैदा किया और विभागीय कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी.
सरकार का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करती हैं और जनता के काम प्रभावित होते हैं. ऐसे में यह कार्रवाई अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी थी.
सिर्फ हड़ताल नहीं, कई गंभीर आरोप
इन अधिकारियों पर सिर्फ हड़ताल में शामिल होने का आरोप नहीं है, बल्कि कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं. इनमें राजस्व संग्रहण का लक्ष्य पूरा नहीं करना, उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं करना और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाना शामिल है. इसके अलावा, जनगणना 2027 जैसे राष्ट्रीय कार्य में बाधा डालने का आरोप भी इन पर लगा है, जिसे सरकार बेहद गंभीर मान रही है.
सस्पेंड करने के साथ ही सरकार ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी. सभी 41 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी और अलग से आदेश जारी होंगे. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में इन अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, जिसमें नौकरी पर स्थायी असर भी संभव है.
कर्मचारी संगठनों का पलटवार
इस कार्रवाई के बाद बिहार राजस्व सेवा महासंघ “बिरसा” और “बिरसा यूनाइटेड” के संयुक्त मोर्चा ने सरकार के कदम को दमनकारी बताया है. उनका कहना है कि वे संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे.
इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में सरकार और अधिकारियों के बीच टकराव और बढ़ सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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