ओवरब्रिज नहीं, नतीजा महाजाम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jun 2016 12:24 AM (IST)
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परेशानी. पूर्वी रेलवे गुमटी पर ‘लाइलाज बीमारी’, लोग हलकान पूर्वी रेलवे गुमटी पर जाम एक लाइलाज बीमारी बन चुका है. रेलवे गुमटी की मात्र 60-70 फुट की दूरी पार करने में कई घंटे लग सकते हैं. अगर गुमटी की दक्षिण तरफ आग लग जाये या हिंसात्मक वारदातें हो जाये, तो स्थिति को संभालने के लिए […]
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परेशानी. पूर्वी रेलवे गुमटी पर ‘लाइलाज बीमारी’, लोग हलकान
पूर्वी रेलवे गुमटी पर जाम एक लाइलाज बीमारी बन चुका है. रेलवे गुमटी की मात्र 60-70 फुट की दूरी पार करने में कई घंटे लग सकते हैं.
अगर गुमटी की दक्षिण तरफ आग लग जाये या हिंसात्मक वारदातें हो जाये, तो स्थिति को संभालने के लिए उत्तर की ओर से अग्निशमन दस्ता अथवा पुलिस बल को उस पार जाने में कितना समय लगेगा, यह कहना भी मुश्किल है.
इस समस्या के बारे में रेलवे के दानापुर डीआरएम से लेकर उच्चाधिकारी तक, संतरी से लेकर मंत्री तक, मुखिया से लेकर सांसद तक, सबको पता है. परंतु रेलवे गुमटी पर ओवरब्रिज का निर्माण कब होगा तथा इस रोज-रोज लगनेवाला महाजाम से छुटकारा कब मिलेगा, यह कोई नहीं बताता?
आरा : पूर्वी रेलवे गुमटी पर वर्षों से लगनेवाले महाजाम से आरा शहर की एक बहुत बड़ी आबादी हर दिन प्रभावित होती है. एंबुलेंस, स्कूली बस, सासाराम, बक्सर से आनेवाली सवारी बसें, मालवाहक वाहन, चार पहिया, दोपहिया, साइकिल सवार सहित हजारों पैदल यात्री हर दिन इसके शिकार होते हैं. पटना-मुगलसराय रेलखंड पर रेलों का परिचालन अत्यधिक होने से रेलवे गुमटी हमेशा बंद रहती है, जिस कारण हर दिन जाम लगता है.
यहां ओवरब्रिज के निर्माण की मांग सालों से की जा रही है लेकिन अब तक जो भी जनप्रतिनिधि हुए, वे ओवरब्रिज निर्माण को लेकर सिर्फ हवाबाजी ही करते रहे. कोई कहता है कि ओवरब्रिज निर्माण को लेकर सर्वेक्षण हो गया है, कोई कहता है कि डीपीआर तैयार हो गया है, तो कोई कहता है कि रेल मंत्रालय से स्वीकृति मिल गयी है, तो कोई कहता है कि वित्त मंत्रालय में स्वीकृति के लिए गया है. अब कौन-सी बात सही है. यह भी कोई नहीं बताता. यह सब कुछ सुनते-सुनते वर्षों बीत गये.
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