जिले से पांच घंटे में पटना पहुंचना मुश्किल

Published at :04 Jun 2016 12:24 AM (IST)
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जिले से पांच घंटे में पटना पहुंचना मुश्किल

चार जिलों के अधिकारी गुजरते हैं इसी मार्ग से रोहतास, कैमूर : बक्सर और भोजपुर जिलों के सारे अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसी मार्ग से गुजरते हैं तथा उन्हें हर समय जाम का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब तक कोई भी विधायक या सांसद ने विधान सभा या संसद में इस मुद्दे को नहीं उठाये. […]

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चार जिलों के अधिकारी गुजरते हैं इसी मार्ग से

रोहतास, कैमूर : बक्सर और भोजपुर जिलों के सारे अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसी मार्ग से गुजरते हैं तथा उन्हें हर समय जाम का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब तक कोई भी विधायक या सांसद ने विधान सभा या संसद में इस मुद्दे को नहीं उठाये. अब इस क्षेत्र की जनता किस जनप्रतिनिधि पर भरोसा करे. यह भी सच बात है कि किसी भी जिले से पांच घंटे में पटना पहुंचने की सरकार की योजना पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
60-70 फुट की दूरी पार करने में लगते हैं घंटों
किसी दिन ऐसा जाम लगता है कि अगर गुमटी के दक्षिण तरफ भीषण आग लग जाये अथवा कोई दंगा-फसाद हो जाये, तो अग्निशमन दस्ता या पुलिस बल को वहां जाने में घंटों लग सकते हैं. कई एंबुलेंसों में मरीज छटपटाते रहते हैं लेकिन जाम के कारण हर कोई असहाय बना रहता है. वहीं इस कड़ी धूप में बसों में बैठे यात्री अथवा राहगीर कड़ी धूप में घंटों खड़े रह कर गुमटी खुलने के इंतजार करते रहते हैं.
क्या कहते हैं आरा के स्टेशन प्रबंधक
आरा रेलवे स्टेशन प्रबंधक एसएन पाठक बताते हैं कि ओवरब्रिज निर्माण को लेकर रेल विभाग की ओर से अबतक किसी प्रकार की सूचना नहीं है. यह बात जरूर सुनने को मिली है कि अब यह बिहार सरकार ही बनायेगी. संभव है कि बिहार सरकार पहले एप्रोच पथ बनाये और बाद में रेलवे की ओर से ओवरब्रिज बनाने में मदद कर दे. उन्होंने बताया कि जहां तक मुझे जानकारी है कि संभवत: अब बिहार सरकार को ही जिम्मा सौंप दिया गया है.
क्या कहते हैं लोग
वार्ड नंबर 39 नवादा की वार्ड आयुक्त सह जदयू महिला की जिलाध्यक्ष पुष्पा सिंह ने कहा कि यह समस्या काफी गंभीर है. इस समस्या का समाधान सांसद स्तर से ही संभव है. लेकिन भाजपा नेता सिर्फ लोगों को सपने दिखाते हैं, लेकिन उसे पूरा करने में यकीन नहीं करते हैं.
अनाईठ वार्ड नंबर 43 निवासी पीएनबी के पूर्व प्रबंधक सह समाजसेवी मदन राम कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों को विकास से कोई लेना-देना नहीं होता है. जनप्रतिनिधि जाति व वोट की राजनीति में विश्वास करते हैं.
वार्ड नंबर 45 के वार्ड आयुक्त अमरेंद्र कुमार ने कहा कि बाइक से बाजार जाने के लिए लोगों को सौ बार सोचना पड़ता है. इसलिए लोग मजबूरी में पैदल जाना पसंद करते हैं. यह दुर्भाग्य है कि वर्षों से ओवरब्रिज निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन कोई सुननेवाला नहीं है.
लावारिस सेवा केंद्र के कार्यकर्ता अवध बिहारी सिंह मेहता ने कहा कि यह समस्या काफी जटिल है. अब तक जितने भी जनप्रतिनिधि हुए, वे हवाबाज ही निकले. किसी को आरा के विकास से मतलब नहीं है.
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