धार्मिक आस्था का केंद्र है कुंडेश्वर शिवमंदिर

Updated at :30 Jul 2013 4:08 AM
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धार्मिक आस्था का केंद्र है कुंडेश्वर शिवमंदिर

* भक्तों की लगी रहती है भीड़ * अभी तक पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी शाहपुर : धार्मिक आस्था का केंद्र प्रखंड का कुंडेश्वर शिवमंदिर पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है. यह मंदिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सरकारी उपेक्षा का दंशझेल रहा है. प्रत्येक वर्ष सावन एवं फागुन माह […]

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* भक्तों की लगी रहती है भीड़

* अभी तक पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी

शाहपुर : धार्मिक आस्था का केंद्र प्रखंड का कुंडेश्वर शिवमंदिर पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है. यह मंदिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सरकारी उपेक्षा का दंशझेल रहा है. प्रत्येक वर्ष सावन एवं फागुन माह की शिवरात्रि के दिन यहां मेला लगता है. इसकी सरकार द्वारा बंदोबस्ती भी की जाती है. बावजूद इसके दर्शनार्थियों को मूलभूत सुविधाएं मयस्यर नहीं है.

* कहां है अवस्थित

कुंडवा शिव मंदिर भोजपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर पश्चिम आरा -बक्सर मुख्य मार्ग एनएच 84 से बिल्कुल सटे उत्तर दिशा में अवस्थित है. शाहपुर प्रखंड मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर पूरब दिशा में यह मंदिर है. यह प्राचीन शिवमंदिर कब बना, इसका कोई लिखित प्रमाण तो नहीं मिलता है, लेकिन लोक गाथायों एवं किदवंतियों के अनुसार यह महाभारतकालीन यानी द्वापरयुग का बताया जाता है. मंदिर की बनावट एवं यहां स्थापित कलाकृतियों से यह अनुमान लगाया जाता है कि मंदिर महाभारत कालीन राजाओं द्वारा बनाया गया है.

किदवंतियों के अनुसार यह मंदिर राजा वाणासुर द्वारा बनाया गया है. वाणासुर इसी स्थान पर आकर गंगा नदी के किनारे तपस्या करता था. छठवीं शताब्दी के आसपास महाकवि वाणभट्ट द्वारा रचित हर्ष रचित में यहां गंगा नदी होने का प्रमाण मिलता है. गंगा नदी के किनारे वाणासुर ने तपस्या के कुछ वर्षो बाद यहां महायज्ञ करने की ठानी यज्ञ के लिए हवन कुंड की खुदाई होने लगी.

इसी खुदाई के दौरान श्रमिकों का फावड़ा, कुदालद्घ शिवलिंग की आकृति वाले पत्थर से टकराया और उस शिवलिंग से खून बहने लगा. खून से लथपथ शिवलिंग को बाहर रखा गया और इसकी सूचना वाणसुर को दी गयी. वाणासुर द्वारा उस रक्त रंजीत शिवलिंग की स्थापना की गयी. चूंकि यह शिवलिग हवनकुंड से मिला था, इसलिए यह कुंडेश्वर शिव के नाम से जाना जाता है.

कहा जाता है कि भगवान शिव ने वाणासुर के सपने में आकर उक्त शिवलिंग को स्थापित करने का आदेश दिया था. ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि कोण से अत्यन्त ही महत्वपूर्ण यह शिवमंदिर समुचित व्यवस्था और प्रोत्साहना का अभाव ङोल रहा था. इस ऐतिहासिक धरोहर की ओर अब सरकार का ध्यान आकर्षित हो पाया है.

* क्या कहते हैं अधिकारी

विधायक मुन्नी देवी ने कहा कि कुंडवा शिव मंदिर को पर्यटक स्थल बनाने के संबंध में संबंधित मंत्री द्वारा पर्यटन स्थल बनाने की स्वीकृति दी गयी है. इसको लेकर डीपीआर तैयार हो गया है. मेरा प्रयास रहेगा कि यह मंदिर जल्द से जल्द पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो. इधर शाहपुर अंचलाधिकारी सुशील कुमार उपाध्याय ने बताया कि कुंडेश्वर शिवमंदिर सर्वेक्षण कर इसकी रिपोर्ट सरकार के पास भेज दी गयी.

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