अगस्त तक 283 योजनाएं पूरी 238 योजनाएं अब भी हैं अधूरी

Updated at :20 Sep 2014 1:46 AM
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अगस्त तक 283 योजनाएं पूरी 238 योजनाएं अब भी हैं अधूरी

आरा: चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 से मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत आनेवाली योजनाओं के चयन के नियम बदलने के साथ ही इसके क्रियान्वयन में तेजी आने के मार्ग प्रशस्त हो गये हैं. पिछले वित्तीय वर्ष 2013-14 में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायकों और पार्षदों की अनुशंसित योजनाओं का चयन जिलास्तरीय चयन समिति […]

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आरा: चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 से मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत आनेवाली योजनाओं के चयन के नियम बदलने के साथ ही इसके क्रियान्वयन में तेजी आने के मार्ग प्रशस्त हो गये हैं. पिछले वित्तीय वर्ष 2013-14 में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायकों और पार्षदों की अनुशंसित योजनाओं का चयन जिलास्तरीय चयन समिति द्वारा अनुमोदन के बाद किया जाता था. वहीं, अब इस वित्तीय वर्ष से जिलास्तरीय चयन समिति के अनुमोदन की कानूनी प्रक्रिया को समाप्त कर दी गयी है. विधायकों व पार्षदों की अनुशंसित योजनाओं को अब जिला योजना पदाधिकारी बिना जिलास्तरीय चयन समिति के अनुमोदन के ही क्रियान्वयन कराना सुनिश्चित करेंगे. सरकार द्वारा इस नियम को शिथिल किये जाने से मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के क्रियान्वयन की गति में तेजी आयेगी. जिले के सात विधायकों तथा तीन पार्षदों द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 तथा वर्ष 2013-14 में 579 योजनाओं की अनुशंसा प्राप्त हुई थी.

इसके बाद जिलास्तरीय चयन समिति ने 563 योजनाओं का अनुमोदन किया था, जबकि 16 योजनाओं को भूमि संबंधी एनओसी नहीं मिलने के कारण रद्द कर दिया गया. अगस्त, 2014 तक मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत चयनित 563 योजनाओं में से 283 योजनाएं अब तक पूरी हो चुकी हैं, जबकि 280 योजनाएं अभी भी अपूर्ण है. वहीं, चालू वित्तीय वर्ष के लिए चार विधायकों से अब तक 109 योजनाओं की अनुशंसा प्राप्त हुई है. इसके लिए जिला योजना पदाधिकारी ने भूमि संबंधी एनओसी के लिए सीओ से प्रस्ताव की मांग की है.

विधायक खर्च कर सकते हैं दो करोड़
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत प्रत्येक विधायक अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की योजनाएं एक वित्तीय वर्ष में दे सकते हैं. जिले से सात विधायक और तीन विधान पार्षद हैं. इनमें से सातों विधायकों ने वित्तीय वर्ष 2012-13 तथा 2013-14 के तहत अपने कोटे के दो-दो करोड़ रुपये की योजनाओं की अनुशंसा कर दी है, जबकि विधान पार्षद हुलास पांडेय ने अब तक एक करोड़ 40-40 लाख, अवधेश नारायण सिंह ने 50-50 लाख तथा संजीव श्याम सिंह ने 30-30 लाख रुपये तक की योजनाओं की अनुशंसा की हैं.
अब तक 2971.93 लाख की योजनाएं छूटीं
भोजपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2012-13 और 2013-14 को मिला कर कुल 2971.93 लाख की योजनाएं छोड़ी जा चुकी हैं. इसके विरुद्ध अगस्त माह तक जिले में 1441.65 लाख रुपये खर्च किये गये हैं. आरा के विधायक की 78 योजनाएं 380.77 लाख रुपये की योजनाएं छोड़ी गयीं. संदेश के विधायक की 52 योजनाएं 301.35 लाख रुपये की छोड़ी गयीं. अगिआंव के विधायक की 83 योजनाएं 405.33 लाख की छोड़ी गयीं. बड़हरा के विधायक की 54 योजनाएं 362.63 लाख की छोड़ दी गयीं.
तरारी के विधायक की 90 योजनाएं 394.88 लाख रुपये की छोड़ दी गयीं. बड़हरा के विधायक की 57 योजनाएं 324.32 लाख की छोड़ी गयीं. जगदीशपुर के विधायक की 77 योजनाएं 411.47 लाख की छोड़ी गयीं. वहीं, विधान पार्षद हुलास पांडेय की 54 योजनाएं 288.44 लाख रुपये की छोड़ी गयीं. अवधेश नारायण सिंह की 30 योजनाएं 82.23 लाख की छोड़ी गयी तथा संजीव श्याम सिंह की चार योजनाएं 20.51 लाख की छोड़ी गयी हैं.
19 तरह के हो सकते हैं काम
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत 19 तरह का काम हो सकता है. इनमें ट्रांसफॉर्मर बदलना, सड़क निर्माण, पीसीसी सहित दर्जन भर कार्य हैं. इनमें से जगदीशपुर के विधायक भाई दिनेश ने अपनी निधि से जले ट्रांसफॉर्मर को बदलने की अनुशंसा की है. वहीं, अमरेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य रूप से सड़क निर्माण व पीसीसी ढलाई का कार्य कराया है. विधान पार्षद संजीव श्याम सिंह ने अधिकांश फर्नीचर बनाने के लिए अनुशंसा की है.
पहले क्या थे नियम
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत योजनाओं का चयन जिलास्तरीय चयन समिति के अनुमोदन के बाद की जाती थी, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2014-15 से इस नियम में बदलाव किया गया है. अब मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजनाओं का चयन जिलास्तरीय चयन समिति के माध्यम से नहीं की जायेगी, बल्कि विधायकों और पार्षदों की अनुशंसित योजनाओं को दो करोड़ की लागत के समतुल्य जिला योजना पदाधिकारी द्वारा भूमि संबंधी एनओसी और प्राक्कलन मिलने के बाद विधायकों व पार्षदों से योजनाओं की प्राथमिकता सूची प्राप्त होने के बाद क्रियान्वयन कराया जायेगा. मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना की क्रियान्वयन एजेंसी के नाम भी बदल दिये गये हैं. पहले क्रियान्वयन एजेंसी का नाम स्थानीय क्षेत्र विकास अभियंत्रण संगठन था, वहीं अब इसका नाम स्थानीय क्षेत्र विकास अभिकरण करने का प्रस्ताव है.
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